सेना के लिए इसरो की तैयारी : अनुपयोगी सैटेलाइट्स को नष्ट करने की तैयारी में जुटा इसरो और जापान, 26 हजार करोड़ की लागत से बन रहा स्पेस बेस्ड सर्विलांस-3 सिस्टम

निजी क्षेत्रों में भी काम शुरू हुआ है

सेना के लिए इसरो की तैयारी : अनुपयोगी सैटेलाइट्स को नष्ट करने की तैयारी में जुटा इसरो और जापान, 26 हजार करोड़ की लागत से बन रहा स्पेस बेस्ड सर्विलांस-3 सिस्टम
निजी क्षेत्रों में भी काम शुरू हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले एक सैटेलाइट बनाने में तीन साल लगते थे, लेकिन अब एक साल में नौ सैटेलाइट तैयार हो रहे हैं।  

जयपुर। इसरो ने सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्पेस बेस्ड सर्विलांस 3 (एसबीएस 3) पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत निजी कंपनियों के सहयोग से 31 सर्विलांस सिस्टम बनाए जाएंगे। अहमदाबाद स्थित इसरो के वैज्ञानिकों का का कहना है कि इन पर करीब 26000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। करीब 20 सैटेलाइट इसरो बनाएगा। इसमें करीब 3 से 4 साल का समय लग सकता है। इसके प्रोजेक्ट के लिए देशभर की 300 से अधिक कंपनियां और स्टार्टअप्स अब स्पेस सेक्टर में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। केन्द्र सरकार भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 लेकर आई है। इसके बाद निजी क्षेत्रों में भी काम शुरू हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले एक सैटेलाइट बनाने में तीन साल लगते थे, लेकिन अब एक साल में नौ सैटेलाइट तैयार हो रहे हैं।  

अंतरिक्ष में दशकों से घूम रहे पुराने और अनुपयोगी सैटेलाइट्स नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। क्योंकि जब भी कोई नया सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा जाता है तो इन सैटेलाइट्स से टकराव की आशंका बनी रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए ऑपरेशन बर्न आउट की शुरूआत की जा रही है। जापान इसमें अहम भूमिका निभा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों का मानना है कि अनुपयोगी सैटेलाइट अंतरिक्ष में 100 से 500 सालों तक घूमते रहते हैं। जिससे नए सैटेलाइट से पहुंचने पर हादसे की संभावना बनी रहती है। 

भूकंप और भूस्खनलन की मिलेगी सटीक जानकारी 
बारिश की सटीक जानकारी मिल रही है। उसी तरह अब जल्द ही आने वाले समय में भूकंप और भूस्खलन की जानकारी समय से पहले ही मिल सकेगी। इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के संयुक्त मिशन निसार से ये संभव हो सकेगा। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार करीब 750 किमी की यात्रा पूरी करने के बाद यह उपग्रह अपनी कक्षा में स्थापित हो चुका है और जल्द की काम शुरू करेगा। दावा किया जा रहा है कि यह तकनीक भूकंप, भूस्खलन और ज्वालामुखी विस्फोट की जानकारी लोगों को दो घंटे से 24 घंटे पहले तक दे सकेगी।  

एग्जीबिशन की स्थापना 
विज्ञान के प्रति बच्चों में रूचि जगाने के लिए अहमदाबाद में विक्रम साराभाई स्पेस एग्जीबिशन सेंटर की स्थापना की गई है। यहां सैटेलाइट्स, लॉन्च व्हीकल्स और थ्रीडी शो प्रदर्शित किए जाते हैं। उनके लिए प्रवेश निशुल्क है। 

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