पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन की उल्टी गिनती शुरू, सोमवार सुबह 10:17 बजे पर होगा लॉन्च

पीएसएलवी-सी62 मिशन की उलटी गिनती शुरू

पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन की उल्टी गिनती शुरू, सोमवार सुबह 10:17 बजे पर होगा लॉन्च

श्रीहरिकोटा में पीएसएलवी-सी62 से ईओएस-एन1 सहित 15 उपग्रहों के प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू। यह इसरो का नए साल का पहला लॉन्च होगा।

चेन्नई। आंध्रप्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र में पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1'पृथ्वी अवलोकन उपग्रह' अभियान और 15 अन्य उपग्रहों के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती रविवार सुबह शुरू हो गयी है। यह मिशन सोमवार सुबह 10:17 पर यह श्रीहरिकोटा से उड़ान भरेगा।नये साल में इसरो का यह पहला लॉन्च होगा। ईओएस-एन1, जिसे अन्वेषा भी कहा जाता है, एक भारतीय हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे डीआरडीओ ने रणनीतिक रक्षा उद्देश्यों के साथ-साथ कृषि, शहरी मानचित्रण और पर्यावरण मूल्यांकन में नागरिक निगरानी के लिए बनाया है।

इसरो ने कहा कि प्रक्षेपण प्राधिकरण बोर्ड (एलएबी) की मंजूरी मिलने और मिशन तैयारी समीक्षा (एमआरआर) से प्रक्षेपण की अनुमति मिलने के बाद, रविवार दोपहर 12:17 बजे 22 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हो गयी। इस अवधि के दौरान चार चरणों वाले इस रॉकेट में प्रणोदक (ईंधन) भरा जायेगा। 

इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर  कहा, मिलिए पीएसएलवी-सी62 से - यह क्कस्रुङ्क की 64वीं उड़ान और पीएसएलवी-डीएल संस्करण का 5वां मिशन है। रॉकेट की मुख्य विशेषताएं: ऊंचाई 44.4 मीटर, उड़ान द्रव्यमान 260 टन, 4 चरण। इसरो ने कहा कि वाहन और उपग्रहों के एकीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है और प्रक्षेपण-पूर्व जांच और अंतिम जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी रही हैं। पीएसएलवी-सी62 मिशन सोमवार  सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। 

पीएसएलवी 44.4 मीटर ऊंचा और 260 टन उड़ान द्रव्यमान वाला चार चरणों वाला रॉकेट है, जो ठोस और तरल प्रणोदकों (ईंधन) से संचालित होता है। यह इसरो का बहुमुखी, सबसे भरोसेमंद और सबसे अधिक काम आने वाला प्रक्षेपण यान है। ईओएस-एन1 और 14 अन्य उपग्रहों को 505 किमी की ऊंचाई पर 97.5 डिग्री के झुकाव के साथ सूर्य तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जायेगा, जबकि केआईडी कैप्सूल को पुन: प्रवेश पथ पर भेजा जायेगा।

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ईओएस-एन1 और 14 उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित करने के बाद पीएस4 चरण (चौथे चरण) को गति कम करने के लिए फिर से चालू किया जायेगा, ताकि वह पुन: प्रवेश पथ पर आ सके। इसके बाद केआईडी कैप्सूल को अलग किया जायेगा। पीएस4 चरण और केआईडी कैप्सूल दोनों ही पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश करेंगे और दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरेंगे।

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पीएसएलवी-सी62 मिशन इसरो की चलाई जाने वाली सबसे लंबी उड़ानों में से एक है। रॉकेट की उड़ान के लगभग 16 मिनट बाद इसके चौथे चरण का इंजन बंद कर दिया जायेगा और करीब एक मिनट तक जड़त्वीय गति से आगे बढ़ेगा और उड़ान भरने के करीब 17 मिनट बाद भारतीय उपग्रह 'अन्वेषा/ईओएस-एन1' और 14 अन्य उपग्रहों को अलग कर दिया जायेगा।

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इस मिशन में छोड़े जाने वाले दिलचस्प उपग्रहों में से एक 'आयुलसैट' होगा, जिसे भारतीय कंपनी 'ऑर्बिटएड' ने विकसित किया है, जो अंतरिक्ष यानों के लिए एक प्रकार का 'अंतरिक्ष ईंधन टैंकर' है। पृथ्वी की कक्षा में ईंधन भरने की इस सुविधा से चक्कर लगा रहे उपग्रहों का जीवनकाल बढ़ जाएगा, जिससे कुल लागत और अंतरिक्ष कचरे दोनों में कमी आयेगी। इसरो ने कहा कि यह न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) संचालित 9वां समर्पित वाणिज्यिक मिशन है, जिसके तहत उपयोगकर्ता के लिए ईओएस-एन1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का निर्माण और प्रक्षेपण किया जा रहा है। इसके साथ ही, इसके माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के 14 अन्य उपग्रहों को भी प्रक्षेपण सेवायें दी जा रही हैं।

पीएसएलवी-सी62 मिशन के दौरान एक स्पेनिश स्टार्टअप केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर का भी प्रदर्शन किया जायेगा, जो उस स्टार्टअप के विकसित किये जा रहे पुन: प्रवेश यान के एक छोटे पैमाने का प्रोटोटाइप है। केआईडी अलग होने वाला अंतिम  उपग्रह होगा, जिसके बाद इसे पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश करने और दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरने के लिए निर्धारित किया गया है। इस प्रक्षेपण में पीएसएलवी-डीएल संस्करण का उपयोग किया जायेगा, जिसमें ठोस ईंधन वाले दो 'स्ट्रैप-ऑन' मोटर लगे होंगे। यह पीएसएलवी-डीएल संस्करण का पांचवां मिशन होगा। यह मिशन पीएसएलवी की 64वीं उड़ान होगी। पीएसएलवी प्रक्षेपण यान ने अब तक 63 उड़ानें पूरी की हैं। इनमें चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान), आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट मिशन जैसे उल्लेखनीय अभियान शामिल हैं।

वर्ष 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के कई महत्वपूर्ण मिशनों की तैयारी के बीच हाल के वर्षों में मिले कुछ झटकों के बाद इन आगामी प्रक्षेपणों का महत्व और भी बढ़ गया है।

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