कर्नाटक: कांग्रेस विधायक यशवंत पाटिल ने वापस लिया इस्तीफा, कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना
नेतृत्व पर उठाए सवाल
विजयपुरा। कर्नाटक में कांग्रेस विधायक यशवंत रायगौडा पाटिल ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और अपने समर्थकों की अपील पर अपना इस्तीफा वापस ले लिया है लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में पद देने के वादे को पूरा नहीं करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की। पाटिल ने विजयपुरा में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने समर्थकों की इच्छा और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के दखल के बाद अपना इस्तीफा वापस लिया। पाटिल ने दावा किया कि सुरजेवाला, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि सत्ता-साझेदारी के वादे के तहत उन्हें कैबिनेट में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रियों की सूची में उनका नाम रहने के बावजूद उसे आखिरी चरण में हटा दिया गया।
उन्होंने कहा, "मुझे इस बात से निराशा नहीं है कि मैं मंत्री नहीं बन पाया। मुझे दुख इस बात का है कि मुझसे किया गया वादा पूरा नहीं किया गया।" उन्होंने कहा कि अब वह मंत्री पद की मांग नहीं करेंगे। पाटिल ने कहा कि उन्होंने राजनीति में सफलता और असफलता दोनों देखी हैं और वह कैबिनेट पद के लिए गुटबाजी किए बिना पार्टी और अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने विजयपुरा जिले के कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि जिन नेताओं का उन्होंने वर्षों तक राजनीतिक रूप से समर्थन किया, वे अब उनके खिलाफ हो गए हैं। पाटिल ने बगैर किसी का नाम लिए कहा कि उन्होंने अपने पिता के समय से ही इस इलाके में कांग्रेस को मजबूत किया है और कई नेताओं को संसदीय और मंत्री पद दिलाने में भूमिका निभाई है।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के लिए अपने राजनीतिक हितों का भी त्याग किया है। पाटिल ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की उन्होंने कभी मदद की थी, वे अब उनके खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि वह कांग्रेस के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे और इस झटके के बावजूद वैचारिक राजनीति करते रहेंगे।

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