राज्यसभा सीट पर नजर, शरद पवार से मिले पार्थ व जय, अजित के निधन के बाद कैसे बदल रहे महाराष्ट्र के सियासी समीकरण?

शरद पवार से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल

राज्यसभा सीट पर नजर, शरद पवार से मिले पार्थ व जय, अजित के निधन के बाद कैसे बदल रहे महाराष्ट्र के सियासी समीकरण?

अजित पवार के निधन के बाद शरद पवार की पार्थ पवार से मुलाकात ने महाराष्ट्र राजनीति में राज्यसभा समीकरण और पवार परिवार की विरासत को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं।

मुम्बई। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से समीकरण बदल रहे हैं। इसी बीच एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने हाल ही में बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान में अजित पवार के बेटों पार्थ पवार और जय पवार के साथ एक अहम बैठक की। औपचारिक रूप से इस मुलाकात में दिवंगत नेता के स्मारक से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में असली फोकस पार्थ पवार की राज्यसभा महत्वाकांक्षा पर टिका हुआ है।
 
सूत्रों के मुताबिक, पार्थ पवार की रुचि सुनेत्रा पवार की राज्यसभा सीट में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनके पास ये सीट 2028 तक है. वजह यह बताई जा रही है कि यह सीट उन्हें केवल आंशिक कार्यकाल ही दे पाएगी। पार्थ की नजर पूरे छह साल के कार्यकाल वाली सीट पर है। ऐसा मौका अप्रैल 2026 में सामने आएगा, जब महाराष्ट्र से राज्यसभा की सात सीटें खाली होंगी। इन सीटों पर फिलहाल शरद पवार, फौजिया खान, रामदास आठवले, धैर्यशील पाटिल, रजनी पाटिल, भागवत कराड और प्रियंका चतुवेर्दी जैसे नेता काबिज हैं। बताया जा रहा है कि पार्थ पवार की नजर खास तौर पर उस सीट पर है, जो इस समय खुद शरद पवार के पास है।
 
राज्यसभा सीट का गणित क्या कहता है
 
महाराष्ट्र से राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को विधायकों के एक तय कोटा के वोट हासिल करने होते हैं। इसका फामूर्ला इस तरह है-
कोटा = कुल विधायक / (खाली सीटें + 1) + 1
महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं और 2026 में 7 राज्यसभा सीटें खाली होंगी।
इस समीकरण से हिसाब लगाएं तो जवाब कुछ यूं आता है-
288  (7 + 1) = 36
36 + 1 = 37
यानी किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 विधायकों के वोट चाहिए होंगे।
 
क्या है मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति?
 
वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो बीजेपी के पास 135 विधायक हैं, शिवसेना के पास 57 और एनसीपी के पास 41 विधायक हैं। यह संख्या सत्तारूढ़ गठबंधन को मजबूत स्थिति में खड़ा करती है और गणितीय रूप से यह गठबंधन कई राज्यसभा सीटें जीतने में सक्षम दिखता है।
 
खासतौर पर एनसीपी के 41 विधायक अपने दम पर एक उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचाने के लिए पर्याप्त हैं। ऐसे में पार्थ पवार के लिए पूरे छह साल का कार्यकाल हासिल करना संभव माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शरद पवार अपनी जल्द खाली होने वाली सीट के लिए पार्थ पवार को आशीर्वाद देंगे, या फिर पवार परिवार के दोनों राजनीतिक खेमों के बीच पवार विरासत को लेकर खींचतान जारी रहेगी। इस वक्त यही सस्पेंस महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है।
Tags:  

Post Comment

Comment List

Latest News

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी को नई गति: 600 करोड़ खर्च, हर माह वेबिनार से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा स्वच्छ भारत मिशन-शहरी को नई गति: 600 करोड़ खर्च, हर माह वेबिनार से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
स्वच्छता के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत वर्ष 2026–27...
प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्र शेखर की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि : उनके आदर्शों के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता का किया आह्वान, बताया परिपूर्ण जन नेता
सर्गेई लावरोव ने की कूटनीतिक रवैये की आलोचना, बोले- वादाखिलाफी की आदत छोड़ बातचीत को प्राथमिकता दे अमेरिका, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के उल्लंघन का लगाया आरोप
निम्स मेडिकल कॉलेज को बड़ी सफलता: 5 घंटे चली जटिल सर्जरी, 15 वर्षीय बच्चे को मिला नया जीवन
दो दिवसीय चुनावी दौरे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सिलीगुड़ी-कोलकाता में कई कार्यक्रम
आरएएस परीक्षा 2024 : साक्षात्कार आज होंगे सम्पन्न, देर रात तक नतीजों की उम्मीद
लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उप सभापति चुने गए हरिवंश : पीएम मोदी और खरगे ने दी बधाई, कहा-सदन का आपके प्रति गहरा विश्वास