पंजाबी गायक मीका सिंह ने दिखाई दरियादिली, आवारा कुत्तों के लिए दान की 10 एकड़ जमीन
आवारा कुत्तों के लिए मीका सिंह की सुप्रीम कोर्ट से अपील
आवारा कुत्तों के मुद्दे पर मीका सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से मानवीय समाधान की अपील की। उन्होंने कुत्तों की देखभाल और आश्रय के लिए 10 एकड़ जमीन दान करने की घोषणा की।
मुंबई। पंजाबी गायक एवं अभिनेता मीका सिंह ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच उच्चतम न्यायालय से भावुक अपील करते हुए कहा है कि वह इन कुत्तों की देखभाल और कल्याण के लिए अपनी दस एकड़ जमीन दान करेंगे। मीका सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि ऐसे किसी भी कदम से बचा जाए जिससे आवारा कुत्तों पर बुरा असर पड़े। उन्होंने लिखा, मीका सिंह उच्चतम न्यायालय से विनम्र निवेदन करता हूं कि कृपया ऐसे किसी भी काम से बचा जाए, जिससे कुत्तों की भलाई पर बुरा असर पड़े।
उन्होंने आवारा कुत्तों के खिलाफ कथित न्यायिक कार्रवाई को लेकर पशु प्रेमियों के बीच व्यापक चिंता को दोहराया। जानवरों के अधिकारों के लिए अपने लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को दोहराते हुए मीका ने कुत्तों की भलाई की खातिर अपनी जमीन देने के लिए सार्वजनिक प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा, मैं सम्मानपूर्वक कहना चाहता हूं कि मेरे पास पर्याप्त जमीन है और मैं कुत्तों की देखभाल, आश्रय और भलाई के लिए विशेष रूप से 10 एकड़ जमीन दान करने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। इसके आगे गायक मीका सिंह ने कहा, इस जमीन का इस्तेमाल उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई सुनिश्चित करने के लिए आश्रय और जरूरी सुविधाएं बनाने के लिए किया जा सकता है।
इसके आगे उन्होंने कुत्तों की प्रभावी ढंग से देखभाल करने के लिये पर्याप्त स्टॉफ और अवसंरचना की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि उचित कार्यान्वयन के बिना केवल जमीन ही काफी नहीं होगी। उन्होंने कहा, मेरा एकमात्र अनुरोध उचित देखभाल करने वालों के रूप में समर्थन है जो इन जानवरों की जिम्मेदारी से देखभाल कर सकें। मैं आश्रय बनाने और कुत्तों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी पहलों के लिए जमीन देने को तैयार हूं।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय सुनवाई कर रहा है और इस मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल ही में, एक सुनवाई के दौरान उच्चत्तम न्यायालय ने साफ किया कि उसने आवारा कुत्तों को पूरी तरह से हटाने का आदेश नहीं दिया है।
न्यायाधीश विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि न्यायालय का ध्यान पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) अधिनियम 2023 को लागू करने पर है, जो आवारा कुत्तों की आबादी को प्रबंधित करने के लिए एक वैज्ञानिक, मानवीय और टिकाऊ तरीका अपनाता है। कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी और उससे लोगों की चिंता को मानते हुए पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि इसका समाधान व्यवस्थित नसबंदी और वैक्सीनेशन में है, ताकि इसके बाद कुत्तों को उनके मूल इलाकों में वापस भेज दिया जाए।
न्यायालय ने कहा कि यह तरीका मनुष्यों की सुरक्षा और जानवरों के कल्याण के बीच संतुलन बनाता है। न्यायाधीशों ने कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचे को एक व्यापक और अच्छी तरह से तालमेल वाली रणनीति की जरूरत है और स्थानीय अधिकारी एबीसी नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में काफी हद तक नाकाम रहे हैं।

Comment List