मेकेदाटू बांध विवाद पर तमिलनाडु-केंद्र आमने-सामने, मुख्यमंत्री विजय ने PM को पत्र लिखकर जताई नाराजगी
मुख्यमंत्री विजय ने कानूनी सिद्धांतों का दिया हवाला
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के लिए महत्वपूर्ण मेकेदाटू बांध मुद्दे पर जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी के बयान को निराशाजनक बताते हुए मंगलवार को केंद्र सरकार से इस बयान को वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा कि अंतर-राज्यीय जल विवादों में स्थापित कानूनों और कानूनी सिद्धांतों का संदर्भ दिये बिना ऐसी टिप्पणी की गयी है। उल्लेखनीय है कि चौधरी ने कहा था कि, 'उच्चतम न्यायालय ने ऐसा कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया है कि कावेरी नदी पर निर्माण के लिए कर्नाटक को निचले तटवर्ती राज्यों की सहमति लेना अनिवार्य है'
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि जल शक्ति राज्य मंत्री का यह निराशाजनक जवाब निचले तटीय राज्यों की सहमति से जुड़े प्रचलित कानूनी रुख और स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखे बिना दिया गया प्रतीत होता है। अलमाटी बांध और केरल की पाम्बार जलविद्युत परियोजना पर न्यायालय की संविधान पीठ के निर्णयों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु का यह स्पष्ट मत है कि प्रस्तावित मेकेदाटू बांध परियोजना का मूल्यांकन महज एक इंजीनियरिंग प्रस्ताव के रूप में नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि इसकी कानूनी स्वीकार्यता की जांच सबसे पहले कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले, 16 फरवरी 2018 के उच्चतम न्यायालय के निर्णय और निचले तटवर्ती राज्यों के अधिकारों के संदर्भ में की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण के निर्णय का अनुपालन एक अनिवार्य पूर्व शर्त है। उन्होंने केंद्र सरकार से अंतर-राज्यीय जल मुद्दों में स्थापित कानूनी सिद्धांतों का संदर्भ दिये बिना राज्यसभा में दिये गये इस उत्तर को वापस लेना सुनिश्चित करने का गंभीर अनुरोध किया।

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