बिहार ग्रामीण कार्य विभाग की अनोखी पहल: प्लास्टिक कचरे से बनाई 7,214 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें
बिहार की सड़कों पर 'ग्रीन क्रांति': प्लास्टिक से निर्माण और हरियाली
ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाते हुए 7,214 किमी से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण। वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग कर सड़कों को मजबूती। 6.40 लाख वृक्षारोपण से पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित। आईआईटी पटना में इंजीनियरों का प्रशिक्षण और हाई-टेक मॉनिटरिंग बिहार के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर ले जाना सुनिश्चित किया।
पटना। बिहार ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में आधुनिक ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए 7,214 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण किया है। बिहार में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा राज्य के सुदूर इलाकों में बारहमासी सड़क का निर्माण कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान किया जा रहा है। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य के साथ एक नया मानक भी स्थापित किया है। पर्यावरण संरक्षण के क्रम में ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में आधुनिक ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए 7,214 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है। यह पहल केवल तकनीकी नवाचार के दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण असंतुलन की चुनौती के दृष्टिकोण से भी एक दूरदर्शी कदम है।
ग्रामीण सड़कों के निर्माण में प्रयुक्त वेस्ट प्लास्टिक न केवल ठोस कचरे के पुनर्चक्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि इससे सड़कों की मजबूती और आयु भी बढ़ती है। प्लास्टिक अपशिष्ट जो पहले पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता था, अब बिहार में ग्रामीण सड़कों की आधारशिला बन रहा है।
सड़क निर्माण के साथ-साथ विभाग ने हरियाली को भी समान महत्व दिया है। ग्रामीण सड़क निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता दिखाते हुए विभाग ने लगभग पिछले एक वर्ष में सड़कों के किनारे 6,40,000 वृक्षारोपण का कार्य किया है। इस विशाल वृक्षारोपण अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और हरित आवरण का विस्तार हुआ है।
इसके साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और आधुनिक निर्माण शैली को देखते हुए विभाग ने अपने नवनियुक्त 480 सहायक अभियंताओं को आईआईटी पटना जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में विशेष प्रशिक्षण दिलाने का अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत अब तक 120 अभियंताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है और जुलाई 2026 तक सभी अभियंताओं को दक्ष बनाने का लक्ष्य है, जिससे राज्य की ग्रामीण सड़कों और पुलों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित हो सके।
वहीं, विभाग अब भविष्य की तकनीक की ओर उन्मुख होते हुए आधुनिक तकनीकी प्रणाली लागू करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है, जिससे सड़कों के रखरखाव में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और तकनीक के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटिंरिग सुनिश्चित की जा सकेगी।
ग्रामीण कार्य विभाग का यह बदलता स्वरूप न केवल आवागमन को सुगम बना रहा है, बल्कि यह सतत विकास, नवाचार, तकनीकी उत्कृष्टता और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण की परंपरा की शुरुआत का नया मॉडल बनकर उभर रहा है। एक तरफ जहां वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने लगभग 1 लाख 20 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण सहित अन्य उपलब्धियों को हासिल किया है और कई मानक स्थापित किए हैं।
वहीं, आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने सड़कों के नए विस्तार, नए पुलों के निर्माण, हाई-टेक मॉनिटिंरिंग की व्यवस्था की सुनिश्चितता के साथ-साथ सात निश्चय-3 के तहत महत्वपूर्ण सड़कों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से सर्वेक्षण का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। यह संपूर्ण प्रयास बिहार के ग्रामीण जनजीवन को आधुनिकता और समृद्धि के एक नए स्तर पर ले जाने के लिए किए जा रहे हैं।

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