बेबी फ़ूड को बिना रेफ्रिजरेशन के 6 महीने तक रख सकते है सुरक्षित, BARC के रिसर्चर्स ने विकसित किया तरीका

बिना फ्रिज छह महीने सुरक्षित रहेगा बेबी फूड

बेबी फ़ूड को बिना रेफ्रिजरेशन के 6 महीने तक रख सकते है सुरक्षित, BARC के रिसर्चर्स ने विकसित किया तरीका

मुंबई के वैज्ञानिकों ने शिशु पोषण के क्षेत्र में एक अहम सफलता हासिल की है। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के शोधकर्ताओं ने गामा रेडिएशन की नियंत्रित डोज़ का उपयोग कर ऐसा बेबी फूड विकसित किया है,

मुंबई। बेबी फ़ूड को बिना रेफ्रिजरेशन के 6 महीने तक ताज़ा और खाने के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। मुंबई के रिसर्चर्स ने बिना किसी प्रिजर्वेटिव के यह तरीका विकसित किया है। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के शोधकर्ताओं ने इसमें गामा रेडिएशन की कंट्रोल्ड डोज़ का प्रयोग किया है। इस रेडिएशन से बच्चों के पोषण में एक बड़ी रुकावट को दूर किया गया है। इससे अब जो वस्तुएं बहुत जल्द खराब होने वाली फलों की प्यूरी को कमरे के तापमान पर उनके प्राकृतिक स्वाद या स्वास्थ्य लाभ को खराब किए बिना स्टोर कर सकते है। इस स्टडी से पता चला है 10 किलो ग्रे (kGy) रेडिएशन की एक खास डोज़ माइक्रोबियल स्टेरिलिटी हासिल कर सकती है, जो बैक्टीरिया, यीस्ट और फफूंदी को प्रभावी तरीके से मार देती है, जिससे फल आमतौर पर कुछ ही घंटों में खराब हो जाते हैं।

बच्चों के फूड को लेकर परिजनों में यह चिंता रहती है कि बच्चों के अंग और इम्यून सिस्टम खाने से होने वाली बीमारियों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। वहीं अगर खाने को उबालते है, तो पारंपरिक थर्मल प्रोसेसिंग से कीटाणु मर जाते है। ऐसा करने से फल में स्वाद और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने एक बेहतर तरीका खोज निकाला है। इसके लिए उन्होंने 60% सेब और 40% केले का मिश्रण बनाकर इसे सील बंद कांच के जार में पैक कर दिया। इन जार को कोबाल्ट-60 सोर्स से गामा किरणों के संपर्क में लाया गया। यह किरणें खाने से होकर निकलती है, जो हानिकारक सूक्ष्मजीवों के डीएनए को बाधित करती हैं और उन्हें बढ़ने से रोकती है। वहीं फूड नॉन-रेडियोएक्टिव और खाने के लिए सुरक्षित रहता है।

ट्रीटमेंट के बाद प्यूरी को 6 महीने तक कमरे के तापमान (28 डिग्री सेल्सियस) पर स्टोर किया गया। समय-समय पर गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (GC/MS) के उपकरणों का उपयोग करके नमूनों की जाँच की। जांच करने का उद्देश्य फल की केमिस्ट्री में बदलाव हुआ है या नहीं यह पता लगाना था। उन्होंने पाया कि फेनोलिक एसिड की कुल मात्रा, जो शरीर में एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करने वाले प्राकृतिक यौगिक हैं, स्टोरेज के दौरान वास्तव में दोगुनी से भी ज़्यादा बढ़ गई। इससे पता चलता है कि रेडिएशन ट्रीटमेंट समय के साथ फल के और भी स्वस्थ गुणों को सामने ला सकता है।

टीम ने पैनल ने 6 महीने की अवधि में प्यूरी का मूल्यांकन किया और बनावट और स्वाद के लिए लगातार इसे हाई स्कोर दिए। हीट-ट्रीटेड प्यूरी के विपरीत, इस रेडिएशन वाली प्यूरी में न तो पतलापन आया और न ही उसमें पके हुए खाने जैसी अजीब गंध आई, जिसकी वजह से अक्सर बच्चे हेल्दी खाना खाने से इनकार कर देते हैं। हालांकि इन 6 माह में प्यूरी की प्राकृतिक खुशबू चली गई। वहींभोजन का मुख्य पोषण मूल्य और सुरक्षा बरकरार रही।

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