1 अप्रैल 2026 से नया नियम लागू : बीमा कंपनियों का मुनाफा 3 गुना तक बढ़ सकता है, जानें नए नियम के बारे में
पीएटी और नेटवर्थ में बड़ा उछाल संभव
IRDA 1 अप्रैल 2026 से भारतीय बीमा कंपनियों में इंड एएस लागू करने जा रहा। नए अकाउंटिंग मानक से लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का मुनाफा और नेटवर्थ स्पष्ट, खासकर तेजी से बढ़ रही कंपनियों को लाभ। खर्च और कमीशन अब पॉलिसी अवधि में फैले दिखेंगे।
नई दिल्ली। भारतीय बीमा सेक्टर में बड़ा बदलाव होने वाला है। बीमा नियामक इरडा ने इंड एएस लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं और इसे 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी है। एमके की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए अकाउंटिंग नियम से लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की कमाई और नेटवर्थ का आंकड़ा काफी बेहतर दिखेगा, हालांकि असल कारोबार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इंड एएस अंतरराष्ट्रीय मानकों (आईएफआरएस) के अनुरूप तैयार अकाउंटिंग सिस्टम है, जिसका उद्देश्य कंपनियों के वित्तीय नतीजों को ज्यादा पारदर्शी और तुलनात्मक बनाना है। दुनिया के कई देशों में बीमा कंपनियां पहले ही आईएफआरएस17 लागू कर चुकी हैं, जबकि भारत में यह कदम अब उठाया जा रहा है।
मुनाफे की तस्वीर होगी ज्यादा साफ :
एमके की रिपोर्ट के अनुसार, आईएनडी एएस लागू होने के बाद कंपनियां पॉलिसी बेचने में होने वाले खर्च और कमीशन को एक साथ दिखाने के बजाय पूरे पॉलिसी अवधि में फैलाकर दिखाएंगी। अभी तक इन खर्चों को शुरुआत में ही दिखाया जाता था, जिससे शुरुआती सालों में मुनाफा कम नजर आता था। नए सिस्टम में यह दबाव कम हो जाएगा और कंपनियों की असली कमाई बेहतर तरीके से सामने आएगी। खासकर तेजी से बढ़ रही कंपनियों को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा।
पीएटी और नेटवर्थ में बड़ा उछाल संभव :
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएनडी एएस लागू होने के बाद लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के मुनाफे पीएटी में 1.5 से 3 गुना तक की बढ़ोतरी दिख सकती है। कुछ छोटी कंपनियों में यह उछाल और ज्यादा हो सकता है। साथ हीए कंपनियों की बैलेंस शीट भी मजबूत नजर आएगी क्योंकि नेटवर्थ और कुल वैल्यू को बेहतर तरीके से दिखाया जाएगा। अभी तक इंश्योरेंस कंपनियों की वैल्यू समझने के लिए इंडियन एंबेडेड वैल्यू (आईईवी) का इस्तेमाल होता है। लेकिन इंड एएस लागू होने के बाद मुनाफा और बैलेंस शीट खुद ज्यादा साफ तस्वीर दिखाएंगे, जिससे आईईवी की जरूरत कम हो सकती है या उसका फॉर्म बदल सकता है। रिपोर्ट साफ करती है कि इंड एएस लागू होने से कंपनियों की सॉल्वेंसी (पूंजी की मजबूती) या डिविडेंड देने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
कारोबार नहीं बदलेगा, सिर्फ दिखाने का तरीका बदलेगा :
एमके का कहना है कि इंड एएस कोई जादू नहीं है जो कंपनियों का असली मुनाफा बदल दे। बीमा कंपनियों की कमाई अभी भी पॉलिसी, लागत, ग्राहक बने रहने और प्राइसिंग जैसे फैक्टर्स पर निर्भर रहेगी। लेकिन यह नया सिस्टम कंपनियों की असली आर्थिक स्थिति को ज्यादा साफ और सटीक तरीके से दिखाएगा।
मुनाफे की तस्वीर होगी ज्यादा साफ :
एमके की रिपोर्ट के अनुसार, आईएनडी एएस लागू होने के बाद कंपनियां पॉलिसी बेचने में होने वाले खर्च और कमीशन को एक साथ दिखाने के बजाय पूरे पॉलिसी अवधि में फैलाकर दिखाएंगी। अभी तक इन खर्चों को शुरुआत में ही दिखाया जाता था, जिससे शुरुआती सालों में मुनाफा कम नजर आता था। नए सिस्टम में यह दबाव कम हो जाएगा और कंपनियों की असली कमाई बेहतर तरीके से सामने आएगी। खासकर तेजी से बढ़ रही कंपनियों को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा।
पीएटी और नेटवर्थ में बड़ा उछाल संभव :
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएनडी एएस लागू होने के बाद लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के मुनाफे पीएटी में 1.5 से 3 गुना तक की बढ़ोतरी दिख सकती है। कुछ छोटी कंपनियों में यह उछाल और ज्यादा हो सकता है। साथ हीए कंपनियों की बैलेंस शीट भी मजबूत नजर आएगी क्योंकि नेटवर्थ और कुल वैल्यू को बेहतर तरीके से दिखाया जाएगा। अभी तक इंश्योरेंस कंपनियों की वैल्यू समझने के लिए इंडियन एंबेडेड वैल्यू (आईईवी) का इस्तेमाल होता है। लेकिन इंड एएस लागू होने के बाद मुनाफा और बैलेंस शीट खुद ज्यादा साफ तस्वीर दिखाएंगे, जिससे आईईवी की जरूरत कम हो सकती है या उसका फॉर्म बदल सकता है। रिपोर्ट साफ करती है कि इंड एएस लागू होने से कंपनियों की सॉल्वेंसी (पूंजी की मजबूती) या डिविडेंड देने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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