लखनऊ में रसोई गैस की किल्लत और महंगाई से ठप हुए छोटे कारोबार, मजदूरों का पलायन तेज
लखनऊ में एलपीजी संकट: छोटे कारोबारियों और मजदूरों का पलायन
लखनऊ में रसोई गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने छोटे दुकानदारों और प्रवासी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। आजमगढ़, देवरिया और बस्ती से आए ठेला-खोमचा संचालक ब्लैक में महंगे सिलेंडर और अनियमित आपूर्ति के कारण धंधा बंद कर गांव लौटने को मजबूर हैं। हजरतगंज से गोमतीनगर तक व्यापार ठप होने से गंभीर आजीविका संकट पैदा हो गया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रसोई गैस की गहराते संकट और बढ़ती कीमतों ने छोटे कारोबारियों और प्रवासी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि पूर्वांचल के जिलों से आए कई मजदूर और ठेला-खोमचा संचालक अपने व्यवसाय बंद कर गांव लौटने को मजबूर हैं।
आजमगढ़, बस्ती, देवरिया, मऊ, बलिया, जौनपुर और कुशीनगर जैसे जिलों से आए लोगों का कहना है कि गैस की अनियमित आपूर्ति और ब्लैक में दोगुने दाम पर सिलेंडर मिलने से रोजी-रोटी चलाना मुश्किल हो गया है। हजरतगंज में बन-मक्खन चाय की दुकान चलाने वाले राकेश मौर्य बताते हैं कि कमाई घट रही है और गैस पर खर्च बढ़ता जा रहा है।
इंदिरा नगर में फास्ट फूड का ठेला लगाने वाले बस्ती निवासी अरविंद मिश्रा कहते हैं कि 10 दिन से सिलेंडर नहीं मिला, जिससे काम पूरी तरह बंद हो गया है। रोजाना 500 रुपये तक कमाने वाले अरविंद अब किराया तक नहीं चुका पा रहे हैं और गांव लौटने का फैसला कर चुके हैं। निशातगंज में चाट बेचने वाले देवरिया निवासी राहुल वर्मा का कहना है कि गैस ब्लैक में बहुत महंगी मिल रही है। मजबूरी में उन्होंने इंडक्शन चूल्हा खरीदा, लेकिन उससे काम की रफ्तार धीमी हो गई है और ग्राहक इंतजार नहीं करते।
गोमतीनगर में बलिया के मनोज सिंह ने बताया कि गैस दोगुने दाम पर मिल रही है, ऐसे में दुकान चलाना असंभव हो गया है। चौक क्षेत्र में कबाब-पराठा बेचने वाले कुशीनगर के मोहम्मद आरिफ के अनुसार, गैस खत्म होने पर उन्होंने लकड़ी से खाना बनाने की कोशिश की, लेकिन मकान मालिक ने इसकी अनुमति नहीं दी, जिससे उनकी आमदनी पूरी तरह प्रभावित हो गई।
संकट का असर केवल ठेला-खोमचा चलाने वालों तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट नगर, टॉकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया और चिनहट जैसे इलाकों में दिहाड़ी मजदूर भी भारी संकट में हैं। कई मजदूर बैग और बिस्तर के साथ शहर छोड़ते नजर आ रहे हैं। सरोजिनी नगर और अमौसी की छोटी इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि काम होने के बावजूद महंगी गैस के कारण जीवन यापन मुश्किल हो गया है।
चिनहट में पैकेजिंग यूनिट में काम करने वाले उन्नाव के मनोज कुमार कहते हैं कि गैस उपलब्ध भी हो तो इतनी महंगी है कि खरीद पाना संभव नहीं। एक होटल में काम कर रहे बहराइच के शंकर सोनी एक हफ्ते से सिलेंडर भरवाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन डीलर स्टॉक न होने की बात कह रहे हैं।
बर्लिंगटन स्थित गुप्ता चाट कॉर्नर के संचालकों ने बताया कि उनका सिलेंडर खत्म होने वाला है और दुकान बंद होने की कगार पर है। वहीं हुसैनगंज में बाटी-चोखा बेचने वाले एक परिवार ने दुकान बंद कर गांव लौटने का फैसला कर लिया है। लखनऊ में एलपीजी संकट ने छोटे व्यापारियों और मजदूरों के सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा कर दिया है। यदि जल्द ही आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो शहर में श्रमिकों का पलायन और छोटे व्यवसायों का बंद होना और तेज हो सकता है।

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