एएनटीएफ ने कसा शिकंजा : राजस्थान में फैलता खतरनाक जाल, मौत का द्वार बनता सिंथेटिक नशा
समाज और प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती
राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में तेजी से फैल रहा सिंथेटिक ड्रग एमडी अब सिर्फ एक नशा नहीं बल्कि गहराता सामाजिक और आर्थिक संकट। पार्टी ड्रग के नाम पर युवाओं में लोकप्रिय यह पदार्थ धीरे-धीरे उन्हें लत, कर्ज, अपराध और अंतत: मौत की ओर धकेल रहा। समाज और प्रशासन के सामने यह एक गंभीर चुनौती।
जयपुर। राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में तेजी से फैल रहा सिंथेटिक ड्रग एमडी (मेफेड्रोन 4 एमएमसी) अब सिर्फ एक नशा नहीं बल्कि गहराता सामाजिक और आर्थिक संकट बन चुका है। पार्टी ड्रग के नाम पर युवाओं में लोकप्रिय यह पदार्थ धीरे-धीरे उन्हें लत, कर्ज, अपराध और अंतत: मौत की ओर धकेल रहा है। आसान निर्माण, भारी मुनाफा और संगठित तस्करी नेटवर्क ने इसे अपराधियों के लिए सोने की खान बना दिया है जबकि समाज और प्रशासन के सामने यह एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है।
एएनटीएफ ने कसा शिकंजा
एएनटीएफ ने सैकड़ों किलो ड्रग्स जब्त की, जिसकी वर्तमान में कीमत करीब 100 करोड़ रुपए है। दो दर्जन से अधिक एमडी ड्रग बनाने की फै्ट्रिरयां ध्वस्त कर तस्करों को दबोचा गया।
क्या है एमडी मेफेड्रोन
एमडी यानी मेफेड्रोन 4 एमएमसी एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट ड्रग है जो मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को तेज करता है। इसके सेवन से व्यक्ति को अत्यधिक ऊर्जा और उत्साह, तेज प्रतिक्रिया, बातचीत और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इस कारण इसे पार्टी ड्रग के रूप में तेजी से अपनाया जा रहा है लेकिन यह बेहद लत लगाने वाला और खतरनाक है।
राजस्थान में कैसे फैला नेटवर्क
प्रदेश में 2020-21 के आस-पास तस्करी शुरू हुई। 2024-25 में स्थानीय फै्ट्रिरयों का खुलासा हुआ। पुराने डोडा-चूरा और शराब तस्कर इसमें सक्रिय हो गए। ये तस्कर गुजरात, महाराष्ट्र से तकनीक और केमिस्ट लाते और यहां बनवाते। जब वहां की टीमों ने इन्हें दबोच लिया और यहीं पर केमिकल और केमिस्ट लगाकर एमडी बनाना शुरू कर दिया। एमडी मुख्य रूप से बाड़मेर, जालौर, सिरोही, जोधपुर, श्रीगंगानगर, प्रतापगढ़, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ में बनाई जा रही है। अब इसका असर जयपुर, कोटा, अजमेर अलवर जैसे शहरों तक पहुंच चुका है।
आसान निर्माण, बड़ा खतरा
एमडी ड्रग को छोटे कमरे में भी बनाया जा सकता है। सामान्य केमिकल्स एसिड सॉल्वेंट से तैयार होता है। साधारण उपकरण, हीटर, इंडक्शन, मिक्सर तक इस्तेमाल कर सकते हैं। एमडी बनाने के लिए गुप्त मिनी फै्ट्रिरयां तेजी से बढ़ीं हैं।
कैसे बन रहा है मौत का द्वार
एमडी की सबसे खतरनाक विशेषता इसकी तेजी से लगने वाली लत है। 2-3 बार सेवन के बाद इंसान एडिक्ट हो जाता है। लंबे समय तक उपयोग से मानसिक विकार, अवसाद और हिंसक प्रवृत्ति शुरू हो जाती है। लगातार 2-3 साल में गंभीर स्वास्थ्य संकट या मौत तक का खतरा पैदा हो जाता है। ओवरडोज लेने वाले लोग आत्मघाती प्रवृत्ति, नस काटना, या हिंसक व्यवहार करने लगते हैं।
क्यों बढ़ रहा है खतरा
आसान केमिकल उपलब्धता
रेगिस्तानी इलाकों में छिपाने की सुविधा
सोशल मीडिया और पार्टी कल्चर
बेरोजगारी और तुरंत कमाई का लालच
एमडी एक धीमा जहर है, जो राजस्थान की युवा पीढ़ी को भीतर से खोखला कर रहा है। यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का भी संकट है। आमजन से अपील है कि यदि कहीं भी नशोखोरी हो रही है तो तुरंत एएनटीएफ को सूचना दें। एएनटीएफ पूरी तत्परता से तस्करों को दबोचेगी।
विकास कुमार आईजी एएनटीएफ

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