स्थायी रोजगार के साथ गांवों के कल्याण के पक्षधर थे टैगोर : गणित ओलंपियाड में बेटियों ने किया बेहतरीन प्रदर्शन, मोदी ने कहा- वर्तमान समय में बुद्ध के विचार और भी अहम

पूर्वोत्तर में बांस क्षेत्र तेजी से फल फूल रहा

स्थायी रोजगार के साथ गांवों के कल्याण के पक्षधर थे टैगोर : गणित ओलंपियाड में बेटियों ने किया बेहतरीन प्रदर्शन, मोदी ने कहा- वर्तमान समय में बुद्ध के विचार और भी अहम
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर लोगों के लिए ऐसे उद्योगों के पक्षधर थे जिनमें स्थायी रोजगार मिलने के साथ ही गांवों का भी कल्याण हो। मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में कहा इस महीने देश के कई हिस्सों में नववर्ष सहित अनेक पर्व-त्योहार मनाए गए।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर लोगों के लिए ऐसे उद्योगों के पक्षधर थे जिनमें स्थायी रोजगार मिलने के साथ ही गांवों का भी कल्याण हो। मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में रविवार को कहा इस महीने देश के कई हिस्सों में नववर्ष सहित अनेक पर्व-त्योहार मनाए गए। कुछ ही दिन बाद नौ मई कोपोच्चीशे बोइशाखके अवसर पर गुरुदेव टैगोर की जयंती मनाएंगे। गुरुदेव बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक महान लेखक और विचारक तो थे ही, उन्होंने कई प्रसिद्ध संस्थानों को भी आकार दिया।उन्होंने कहा कि गुरुदेव टैगोर लोगों के लिए ऐसे उद्योगों के पक्षधर थे, जिनमें स्थायी रोजगार मिलने के साथ ही गांवों का भी कल्याण हो। उनके रवींद्र संगीत का प्रभाव आज भी दुनिया-भर में बना हुआ है। मेरे लिए शांति निकेतन की यात्राएं अविस्मरणीय रहीं। यह वही संस्थान है, जिसे उन्होंने पूरे समर्पण भाव से सींचा और संवारा था। 

उन्हें एक बार फिर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। प्रधानमंत्री ने कहा कि मई का महीना 1857 में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की स्मरण भी दिलाता है। मैं मां भारती की सभी वीर संतानों को नमन करता हूं, जिन्होंने लोगों में देश-भक्ति की भावना जागृत की थी। यह समय स्कूली बच्चों की छुट्टियों का भी होता है। मेरा आग्रह है कि वे अपनी छुट्टियों का भरपूर आनंद लें और कुछ नया सीखने का प्रयास करें। गर्मियों के इस मौसम में आप सभी अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखें। 

गणित ओलंपियाड में हमारी बेटियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया: मोदी
मोदी ने कहा कि फ्रांस के बोरदोमें यूरोपियन गल्र्स मैथेमेटिकल ओलंपियाड में हमारी बेटियों ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया और यह टीम विश्व में छठे स्थान पर रही।मोदी ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में फ्रांस के बोरदो में यूरोपियन गर्ल्स मैथेमेटिकल ओलंपियाड का आयोजन हुआ। गणित में गहरी रुचि रखने वाली स्कूली छात्राओं के लिए ये एक बड़ी प्रतियोगिता थी। यह दुनिया की सबसे सम्मानित प्रतियोगिताओं में से एक है। इस ओलंपियाड में हमारी बेटियों ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्हें इस प्रतिभाशाली टीम पर बहुत गर्व है। इसमें मुंबई की श्रेया मुंधड़ा, तिरुवनंतपुरम की संजना चाको, चेन्नई की शिवानी भरत कुमार और कोलकाता की श्रिमोयी बेरा शामिल थीं। इसमें हमारी टीम विश्व में छठे स्थान पर रही। इस प्रतियोगिता में श्रेया ने स्वर्ण पदत जीतकर इतिहास रच दिया, संजना ने सिल्वर, तो शिवानी ने कांस्य पदक अपने नाम किया।

उन्होंने कहा कि इस ओलंपियाड के लिए भारत में जो चयन की प्रक्रिया है, वो अपने आप में बहुत कठिन है। इसका एक बहु स्तरीय चयन प्रक्रिया है। इसमें क्षेत्रीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कठिन चुनौतियों को पार करना होता है। इसके बाद सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राएँ एक महीने के गणित प्रशिक्षण शिविर में शामिल होती हैं। इस शिविर के आखिर में टीम चयन टेस्ट होता है। इसमें प्रदर्शन  के आधार पर ही भारत की टीम चुनी जाती है।उन्होंने कहा कि हर वर्ष देश-भर की करीब 6 लाखछात्राओं ने इस मैथेमेटिकल ओलंपियाड कार्यक्रम  में हिस्सा लेती हैं। समय के साथ यह संख्या लगातार बढ़ रही है, यानि देश की बेटियों के बीच ओलंपियाड की यह संस्कृति तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इन होनहार बेटियों को समर्थन करने के लिए मैं उनके अभिभावकों की भी सराहना करता हूँ।

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वर्तमान समय में बुद्ध के विचार और भी अहम: मोदी

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मोदी ने कहा कि आज दुनिया जिस तरह के तनावों और संघर्षों से गुजर रही है। ऐसे समय में बुद्ध के विचार और भी अहम हो गए हैं। सभी देशवासियों को अपनी अग्रिम शुभकामनाएं देता हूँ। भगवान गौतम बुद्ध का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने हमें सिखाया है कि शांति हमारे भीतर से शुरू होती है, उन्होंने बताया है कि स्वयं पर विजय सबसे बड़ी विजय होती है। आज दुनिया जिस तरह के तनावों और संघर्षों से गुजर रही है। ऐसे समय में बुद्ध के विचार और भी अहम हो गए हैं। उन्होंने कहा, दक्षिण अमेरिका के चिली में एक संस्था भगवान बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ा रही है। लद्दाख में हुए ड्रबपोन ओत्जर रिनपोचे  के मार्गदर्शन में काम हो रहा है। ये संस्था ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रही है। कोचीगुआज घाटी में बना स्तूप लोगों को शांति का अनुभव कराता है। वाकई, यह देखकर गर्व होता है। भारत की प्राचीन धारा पूरी दुनिया तक पहुँच रही है। दूर-दराज के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि बौद्ध परंपरा हमें प्रकृति से जुडऩा भी सिखाती है। भगवान बुद्ध को ज्ञान एक वृक्ष के नीचे मिला था। प्रकृति हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। देश में भी ऐसे प्रयास हो रहे हैं। कर्नाटक में कर्मा मोनास्ट्री इसका अच्छा उदाहरण है। यह मठ एक जीवंत वन क्षेत्र है, जो, 100 एकड़ में फैला है। इस वन में 700 से अधिक देसी वृक्षों को संरक्षित किया गया है। साथियो, बुद्ध का संदेश सिर्फ अतीत नहीं है। यह आज भी प्रासंगिक है और भविष्य के लिए भी जरूरी है। बुद्ध पूर्णिमा का यह अवसर प्रेरणा देता है। हम अपने जीवन में शांति बढ़ाएँ, करुणा अपनाएं और संतुलन के साथ आगे बढ़ें।

पूर्वोत्तर में बांस क्षेत्र तेजी से फल फूल रहा: मोदी

मोदी ने कहा है कि बांस की परिभाषा बदलने से पूर्वोत्तर में बड़ा बदलाव आया है और यह क्षेत्र तेजी से फल फूल रहा है। मोदी ने कहा, पूर्वोत्तर हम सब के लिए अष्टलक्ष्मी है। यहां भरपूर प्रतिभा है और पूर्वोत्तर की प्राकृतिक सुंदरता भी सबका ध्यान खींचती है। मन की बात में भी हम अक्सर पूर्वोत्तर के लोगों की उपलब्धियों पर चर्चा करते आए हैं। आज ऐसी ही एक और उपलब्धि बांस सेक्टर में पूर्वोत्तर  की सफलता। जिस चीज को कभी बोझ के रूप में देखा जाता था, वह आज रोजगार, कारोबार और नवाचार को नई गति दे रही है। हमारी माताएं-बहनें इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बांस की परिभाषा बदल देने से कितना बड़ा परिवर्तन आया है। अंग्रेजों के बनाए कानून के हिसाब से बांस को पेड़ के रूप में परिभाषित किया गया था और इससे जुड़े नियम बहुत कड़े थे। कहीं पर भी बांस को ले जाना बहुत मुश्किल था। ऐसे में यहां के लोग बांस से जुड़े काम-धंधे से दूर होते गए।

न्होंने कहा, त्रिपुरा के गोमती जिले के बिजॉय सूत्रधार और दक्षिण त्रिपुरा के प्रदीप चक्रवर्ती की बात करें। इन्होंने नए कानूनों को अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा। फिर इन्होंने अपने काम को तकनीक से जोड़ा। आज वे पहले से कहीं बेहतर और कहीं ज्यादा बांस के उत्पाद बना रहे हैं। नागालैंड के दीमापुर और आसपास के इलाकों में कई ऐसे स्वयं सहायता समूह हैं जिन्होंने बांस से जुड़े खाद्य उत्पाद में वैल्यू एडिशन किया है। वहां खोरोलो क्रिएटिव क्राफ्ट जैसी टीमें भी हैं, जो, बांस के फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट पर काम कर रही हैं।

मोदी ने कहा, मैंने यहां पर कुछ ही उदाहरण दिए हैं। देश में बांस क्षेत्र की सफलता की यह सूची काफी लंबी है। मैं आप सभी से आग्रह करूंगा कि पूर्वोत्तर का कोई--कोई बांस का उत्पाद जरूर खरीदें। आपके इस प्रयास से उन लोगों का हौसला बढ़ेगा, जो बांस उत्पाद को बनाने में अपना पसीना बहाते हैं।

 

 

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