ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने की पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ से फोन पर बात: नवीनतम क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर हुई चर्चा, संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर
ईरान-पाकिस्तान कूटनीति: राष्ट्रपति पेजेशकियान और शहबाज शरीफ की वार्ता
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने फोन पर पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात पर चर्चा की। पेजेशकियान ने मुस्लिम देशों से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी या इजरायली हमलों के लिए अपनी जमीन का उपयोग न होने दें। पाकिस्तान इस संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभाने और क्षेत्रीय शांति बहाल करने का प्रयास कर रहा है।
ईरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को फोन पर बातचीत पश्चिमी एशिया के ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत 23 मार्च को पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री इशाक डार और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद हुई है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''उन्होंने नवीनतम क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री ने क्षेत्र और उससे बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। दोनों पक्ष बदलती स्थिति पर निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए।''
मंगलवार को आई खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तान खुद को दोनों युद्धरत पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है और इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी करने का प्रयास कर रहा है, हालांकि इन रिपोर्टों की कोई पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी (एमएनए) ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति पेज़ेशकियन और शहबाज शरीफ ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय घटनाक्रमों और अमेरिका तथा इजरायल द्वारा किये गये अवैध हमले के क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की।
पेज़ेशकियन ने इस्लामी देशों से आह्वान किया कि वे अमेरिका या इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ हमलों के लिए अपने क्षेत्र या संसाधनों के उपयोग की अनुमति न दें। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्रीय देश युद्ध जारी रहने को नहीं रोक सकते, तो उन्हें कम से कम ईरान के खिलाफ निरंतर कार्रवाइयों को सुगम नहीं बनाना चाहिए। शरीफ ने तनाव कम करने और स्थायी शांति एवं स्थिरता बहाल करने के लिए क्षेत्रीय देशों, विशेष रूप से मुस्लिम देशों द्वारा सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

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