आर्मेनिया सरकार को जयशंकर ने दिया धन्यवाद: 550 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से निकालने में की मदद, बचाव अभियान जारी
आर्मेनिया की मदद से 550 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
ईरान में फंसे 550 से अधिक भारतीयों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस चुनौतीपूर्ण समय में सहयोग के लिए आर्मेनिया का आभार व्यक्त किया। छात्र और तीर्थयात्री सड़क मार्ग से आर्मेनिया पहुँच रहे हैं, जहाँ से उन्हें विशेष उड़ानों द्वारा दिल्ली लाया जा रहा है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है।
नई दिल्ली। आर्मेनिया ने ईरान में फंसे 550 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में भारत की मदद की है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को ईरान से अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में सहयोग के लिए आर्मेनिया सरकार और वहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ईरान से अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी की सुविधा प्रदान करने के लिए आर्मेनिया की सरकार और लोगों को धन्यवाद। इन चुनौतीपूर्ण समय में उनके समर्थन की सराहना करता हूं।
छात्रों, तीर्थयात्रियों और व्यवसायियों सहित भारतीय नागरिक ईरान के विभिन्न शहरों से सड़क मार्ग के जरिए सीमा पार कर आर्मेनिया पहुँच रहे हैं। वहां से इन लोगों को येरेवन के शॉर्ट नोट्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डेसे व्यावसायिक उड़ानों (जैसे दुबई के रास्ते) के माध्यम से नयी दिल्ली वापस लाया जा रहा है।
हालांकि, अब तक 550 से अधिक लोगों को निकाला जा चुका है, लेकिन यह अभियान अभी भी जारी है। इसी मार्ग से 15 मार्च को मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के 70 छात्रों का एक जत्था दिल्ली पहुँचा था। इस पूरे प्रयास का प्रबंधन तेहरान और येरेवन में स्थित भारतीय मिशनों द्वारा आर्मेनियाई अधिकारियों के साथ घनिष्ठ सहयोग से किया जा रहा है। सरकार ने 12 मार्च को कहा था कि वह उन भारतीय नागरिकों की सहायता कर रही है जो अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते व्यावसायिक उड़ानों से घर लौटना चाहते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हम उन्हें वीजा और सड़क मार्ग से सीमा पार करने में सहायता कर रहे हैं। जायसवाल ने यह भी कहा कि सरकार ने तेहरान में रहने वाले कई भारतीयों को देश के अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया है और जो लोग आर्मेनिया या अजरबैजान के रास्ते वापस आना चाहते हैं, उन्हें वीजा संबंधी मदद दी जा रही है।

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