अखिलेश यादव का विदेश नीति को लेकर सरकार पर तीखा हमला, बोले-युद्ध जैसे हालातों में संसद और सरकार की प्राथमिकताएं उसी के अनुरूप तय हो

युद्ध संकट पर अखिलेश यादव का प्रहार

अखिलेश यादव का विदेश नीति को लेकर सरकार पर तीखा हमला, बोले-युद्ध जैसे हालातों में संसद और सरकार की प्राथमिकताएं उसी के अनुरूप तय हो

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने युद्ध के हालातों के बीच भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को गिरवी न रखने की अपील की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि युद्ध क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों और पत्रकारों को सुरक्षित वापस लाया जाए। साथ ही, तेल आपूर्ति और बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाकर देश की संप्रभुता की रक्षा करने पर जोर दिया।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि जब संसद के बजट सत्र का अंतराल हुआ था तब परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन आज युद्ध जैसे हालात बन जाने के कारण देश के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। ऐसे संकट के समय संसद और सरकार की प्राथमिकताएँ भी उसी के अनुरूप तय होनी चाहिए। सोमवार को सोशल मीडिया के जरिये अखिलेश यादव ने कहा कि इस समय सबसे पहले युद्ध की स्थिति में भारत का स्पष्ट पक्ष और राय सामने रखने की जरूरत है। इसके साथ ही विदेश नीति को किसी दबाव में गिरवी रखने का सवाल भी गंभीर है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरागत स्वतंत्र विदेश नीति हमेशा देशहित को ध्यान में रखकर चलती रही है।

अखिलेश यादव ने कहा कि तेल जैसी महत्वपूर्ण आपूर्ति के मामले में भी भारत को आत्मनिर्णय का अधिकार होना चाहिए। यदि किसी विदेशी दबाव या अमेरिकी आदेश के आधार पर निर्णय लिये जाते हैं तो इससे देश की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे या पर्यटक के रूप में गये भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वहाँ फँसे सभी भारतीयों को सुरक्षित और शीघ्र भारत वापस लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।   

सपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ विदेश दौरे पर गये कुछ पत्रकार और मीडियाकर्मी भी युद्ध शुरू होने के कारण वापस नहीं लौट पाए हैं। सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें सुरक्षित देश वापस लाने की व्यवस्था करनी चाहिए। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि युद्ध की स्थिति में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सरकार को जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति नियमित और सुनिश्चित रखने के साथ-साथ उनके बढ़ते दामों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

 

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