यूएन रिपोर्ट में खौफनाक सच हुआ बेनकाब: इजरायली जेलें फिलीस्तीनियों के लिए सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला, अब तक 100 से ज्यादा कैदियों की हिरासत में मौत 

इजरायली जेलों में क्रूरता: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खौफनाक खुलासे

यूएन रिपोर्ट में खौफनाक सच हुआ बेनकाब: इजरायली जेलें फिलीस्तीनियों के लिए सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला, अब तक 100 से ज्यादा कैदियों की हिरासत में मौत 

संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने इजरायली हिरासत केंद्रों को 'बर्बरता की प्रयोगशाला' करार दिया है। अक्टूबर 2023 से 1,500 बच्चों सहित 18,500 फिलिस्तीनियों को कैद किया गया है। रिपोर्ट में यौन शोषण, भुखमरी और अमानवीय यातनाओं का खुलासा करते हुए इसे 'राजकीय नीति' और नरसंहार का हथियार बताया गया है।

जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने इजरायली हिरासत केंद्रों के भीतर छिपे उस खौफनाक सच को बेनकाब कर दिया है, जिसे अब 'राज्य के सिद्धांत' के रूप में अपनाया जा चुका है। अक्टूबर 2023 से अब तक जुल्म की यह शृंखला 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को अपनी चपेट में ले चुकी है, जिनमें 1,500 से ज्यादा मासूम बच्चे शामिल हैं।

ये आंकड़े महज संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों जिंदगियों की दास्तान हैं, जिन्हें बिना किसी आरोप या मुकदमे के सलाखों के पीछे धकेल दिया गया है। करीब 100 कैदियों की हिरासत में हुई मौतें इस व्यवस्था की भयावहता की गवाही देती हैं। इजरायली जेलें अब सुधार गृह नहीं, बल्कि 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' बन चुकी हैं। जहां कैदियों के साथ ऐसी अमानवीय और घिनौनी हरकतें की जा रही हैं, जो इंसानियत को शर्मसार कर दें। लोहे की छड़ों और चाकुओं से यौन शोषण, हड्डियों और दांतों को बेरहमी से तोड़ना, भूखा रखना और कैदियों पर कुत्तों से हमला करवाकर उन पर पेशाब करना— ये वे अकल्पनीय प्रताड़नाएं हैं, जिनका उद्देश्य फिलिस्तीनियों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक तौर पर भी पूरी तरह तोड़ देना है। यह संगठित बर्बरता अब अंधेरे में नहीं, बल्कि सत्ता के ऊंचे गलियारों की शह पर खुलेआम अंजाम दी जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि दशकों से मिल रही छूट और राजनीतिक संरक्षण के चलते, फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की व्यवस्थित प्रताड़ना अब कब्जे वाले फिलीस्तीनी क्षेत्र में जारी 'नरसंहार' का परिभाषित हथियार बन गयी है। 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने मानवाधिकार परिषद को सौंपी अपनी नयी रिपोर्ट में कहा, "नरसंहार की शुरुआत के बाद से, इजरायली जेल प्रणाली 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' में बदल गयी है।" 

अल्बानीज के अनुसार, "जो कभी अंधेरे और साये में किया जाता था, वह अब खुलेआम हो रहा है। संगठित अपमान, पीड़ा और अधोगति का यह शासन अब उच्चतम राजनीतिक स्तरों से स्वीकृत है।" यानी, जो दर्द पहले छिपाया जाता था, अब उसे सत्ता की शह पर सरेआम अंजाम दिया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर सहित वरिष्ठ अधिकारियों की लागू की गयी नीतियों ने प्रताड़ना, सामूहिक दंड और हिरासत की अमानवीय स्थितियों को एक संस्थानिक रूप दे दिया है। यह फिलिस्तीनियों को इंसान न समझने की एक सोची-समझी नीति है।

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विशेष दूत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों के इन जघन्य उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जांच और न्याय का सामना करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध के समय भी इन अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता और अपराधियों को 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय' (आईसीसी) के कटघरे में खड़ा होना होगा। अल्बानीज की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अक्टूबर 2023 से अब तक पूरे कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें कम से कम 1,500 बच्चे शामिल हैं। हजारों लोग बिना किसी आरोप या मुकदमे के कैद हैं, कई 'जबरन गायब' कर दिये गये हैं और लगभग 100 कैदियों की हिरासत में मौत हो चुकी है।

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कैदियों के साथ ऐसी दरिंदगी की गयी है जो कल्पना से परे है। रिपोर्ट में बोतलों, लोहे की छड़ों और चाकुओं से बलात्कार, भुखमरी, हड्डियां और दांत तोड़ना, शरीर को जलाना, थूकना और कुत्तों से हमला करवाना व उन पर पेशाब करवाने जैसी भयानक प्रताड़नाओं का जिक्र है।
वर्ष 2025 में प्रताड़ना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समिति ने भी 'संगठित और व्यापक प्रताड़ना की एक वास्तविक 'राज्य की नीति' की निंदा की थी, जो 7 अक्टूबर 2023 के बाद से बेहद गंभीर हो गयी है।

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इस बर्बरता को दुनियाभर के राजनेताओं से बचाव मिल रहा है। कानूनी संस्थाएं इसे तर्कसंगत बता रही हैं। मीडिया इसे साफ-सुथरा कर पेश कर रहा है। दुनिया की वे सरकारें इसे सहन कर रही हैं, जो इजरायल को हथियार और सुरक्षा देना जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रताड़ना केवल जेल की दीवारों तक सीमित नहीं है। निरंतर बमबारी, जबरन विस्थापन, भुखमरी, घरों-अस्पतालों की तबाही और सैन्य व बसने वाले आतंकी समूहों के खौफ ने पूरे फिलिस्तीनी क्षेत्र को एक 'प्रताड़नाकारी माहौल' में बदल दिया है।

अल्बानीज ने भावुक होकर कहा, "गाज़ा, वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुसलेम में फिलीस्तीनी पीड़ा की अटूट शृंखला से गुजर रहे हैं। वहां कोई शरण नहीं है, कोई सुरक्षित कोना नहीं है, जीने के लिए कोई महफूज जगह नहीं बची है।" अल्बानीज़ ने इजरायल से प्रताड़ना के सभी कृत्यों को तुरंत रोकने, अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को प्रवेश देने और कब्जे को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होने तक दोषियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया और सदस्य देशों से नरसंहार और प्रताड़ना को रोकने के अपने कानूनी दायित्वों को निभाने की अपील की। इनमें इतामार बेन-ग्वीर, बेजालेल स्मोट्रिच और इजरायल काट्ज जैसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी वारंट जारी करना शामिल है।

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