राहत की खबर : घट गई महंगाई, खुदरा मुद्रास्फीति 14 साल के न्यूनतम स्तर पर, जीएसटी की दरों में आया कमी का असर

ग्रामीण और शहरी इलाकों में अलग 

राहत की खबर : घट गई महंगाई, खुदरा मुद्रास्फीति 14 साल के न्यूनतम स्तर पर, जीएसटी की दरों में आया कमी का असर

अक्टूबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 0.25% पर आ गई, जो 2011-12 के आधार वर्ष के बाद न्यूनतम स्तर है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी गिरावट और जीएसटी दरों में कमी इसका मुख्य कारण रही। ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति 0.25% नकारात्मक रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.88% दर्ज की गई।

नई दिल्ली। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में सालाना आधार पर भारी गिरावट और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कमी के बाजार प्रभाव के बीच उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में और घटकर 0.25 प्रतिशत के स्तर पर आ गई।  सांख्यिकी एवं कार्यक्रम मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी अक्टूबर के सीपीआई आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011-12 की कीमतों को आधार बनाकर जारी की जा रही सीपीआई श्रृंखला में यह खुदरा मुद्रास्फीति का न्यूनतम स्तर है। अक्टूबर में खाद्य वर्ग में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर शून्य से 5.02 प्रतिशत नीचे रही। सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि वस्तु एवं सेवा कर में कमी का असर अक्टूबर में हर क्षेत्र के खुदरा मूल्यों पर परिलक्षित हुआ है।

ग्रामीण और शहरी इलाकों में अलग :

अक्टूबर में ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा मुद्रास्फीति शून्य से 0.25 प्रतिशत नीचे रही, जबकि शहरी इलाकों में खुदरा मूल्य सालाना आधार पर 0.88 प्रतिशत ऊपर थे। सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 1.44 प्रतिशत थी और माह के दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में खुदरा मुद्रास्फीति क्रमश: 1.07 प्रतिशत और 1.83 प्रतिशत दर्ज की गई थी। पिछले साल अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति 6.21 प्रतिशत थी।

यह रहे मुख्य कारण :

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अक्टूबर 2025 के दौरान खुदरा  मुद्रास्फीति और खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट मुख्य रूप से जीएसटी में गिरावट, अनुकूल आधार प्रभाव और तेल एवं वसा, सब्जियां, फल, अंडे, जूते, अनाज और उत्पाद, परिवहन और संचार आदि की मुद्रास्फीति में गिरावट के पूरे महीने के प्रभाव के कारण है। अक्टूबर में सब्जियों की खुदरा कीमतें सालाना आधार पर 27.57 प्रतिशत नीचे थीं जबकि दालों और उसके उत्पादों के भाव 16.15 प्रतिशत तथा मसालों के भाव औसतन 3.29 प्रतिशत नीचे थे।  

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