ढाई साल बाद महिला आरक्षण लागू कर परिसीमन की बात करने लगी सरकार : यह कदम विफलता छिपाने का प्रयास, जयराम बोले- ईंधन संकट से ध्यान भटकाने की एक कोशिश
परिसीमन और जनगणना दोनों का काम पूरा होना आवश्यक
कांग्रेस ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ढाई साल बाद अचानक इसे लागू करने की बात ध्यान भटकाने की कोशिश है। जयराम रमेश ने कहा, पहले परिसीमन और जनगणना जरूरी बताई गई थी, अब बिना इसके पहल हो रही है। विपक्ष ने संशोधनों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग की है।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि सरकार अचानक करीब ढाई साल बाद महिला आरक्षण लागू कर परिसीमन की बात करने लगी है, जिससे साफ है कि उसका यह कदम अपनी विफलताओं और पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण उपजे ईंधन संकट से ध्यान भटकाने का एक प्रयास है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कहा कि सितंबर 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन नारी वंदन अधिनियम, 2023 यानी महिला आरक्षण विधेयक पारित करके किया गया था, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया। इन दोनों आरक्षणों को परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू किया जाना था।
उन्होंने सरकार को याद दिलाते हुए कहा कि जब नारी वंदन अधिनियम, 2023 पर संसद में बहस चल रही थी, तब कांग्रेस ने मांग की थी कि इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने जवाब देते हुए कहा था कि यह संभव नहीं है, क्योंकि पहले परिसीमन और जनगणना दोनों का काम पूरा होना आवश्यक है। अब 30 महीने बाद अचानक सरकार बिना परिसीमन और जनगणना कराए ही आरक्षण लागू करना चाहती है। रमेश ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, सरकार जन ध्यान भटकाने वाले हथियार चलाने में माहिर हैं। अपनी विदेश नीति की विफलताओं और झटकों से तथा देश के सामने खड़े एलपीजी और ऊर्जा संकट से ध्यान हटाने के लिए सरकार यह नई पहल लेकर आई हैं। इसका पूरा राजनीतिक लाभ लेने के लिए उन्होंने संकेत दिया है कि अगले पखवाड़े में नारी वंदन अधिनियम, 2023 में आवश्यक संशोधन पारित करने के लिए संसद का विशेष दो-दिवसीय सत्र बुलाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि विपक्षी दलों ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि पहले 29 अप्रैल को मौजूदा विधानसभा चुनावों का दौर पूरा होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की जा सके। सरकार लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की भी योजना बना रही है। इस पर भी गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है। उनका कहना था कि अप्रैल में दो-दिवसीय विशेष सत्र बुलाना नियमों का उल्लंघन होगा। इससे यह सवाल भी गंभीर रूप से उठता है कि अप्रैल 2025 में घोषित जाति जनगणना को असल में कराने के प्रति सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता क्या है, जबकि इससे पहले भारत जोड़ो न्याय यात्रा और 2024 लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान इस मांग को उठाने पर कांग्रेस के नेताओं पर अर्बन नक्सल मानसिकता का आरोप लगाया गया था।

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