एसीपी/एमएसीपी में नया स्पष्टीकरण : एपीएआर अधूरे होने पर आगे के वर्षों से होगी पूर्ति, बढ़ेगी देयता अवधि
वित्तीय उन्नयन स्वीकृत किया जाएगा
वित्त विभाग ने एसीपी/एमएसीपी उन्नयन पर स्पष्टीकरण जारी। एसीपी के लिए 7 और एमएसीपी के लिए 9 वर्ष के एपीएआर जरूरी। कमी होने पर आगामी वर्षों से पूर्ति की जा सकेगी। ऐसे मामलों में वित्तीय उन्नयन की देय तिथि भी उतने वर्षों के लिए आगे बढ़ा दी जाएगी, जिससे लाभ मिलने में देरी होगी।
जयपुर। वित्त विभाग ने एसीपी/एमएसीपी योजना के तहत वित्तीय उन्नयन को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। आदेश के अनुसार राज्य कार्मिकों को संतोषजनक सेवा के आधार पर एसीपी के लिए 7 वर्ष तथा एमएसीपी के लिए 9 वर्षों के वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (एपीएआर) आवश्यक होते हैं। यदि निर्धारित अवधि के एपीएआर उपलब्ध नहीं होते हैं, तो कमी वाले वर्षों की पूर्ति आगामी वर्षों के एपीएआर से की जा सकेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही आवश्यक 7 या 9 वर्ष के एपीएआर पूर्ण होंगे, उसी आधार पर वित्तीय उन्नयन स्वीकृत किया जाएगा।
हालांकि, इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी गई है। जिन मामलों में आगामी वर्षों के एपीएआर जोड़कर सेवा को संतोषजनक माना जाएगा, उन मामलों में एसीपी/एमएसीपी की देयता तिथि भी उतने ही वर्षों के लिए आगे बढ़ा दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कार्मिक के एसीपी हेतु एक वर्ष का एपीएआर कम है और उसे अगले वर्ष से पूरा किया जाता है, तो उसकी एसीपी भी एक वर्ष बाद स्वीकृत होगी। इसी प्रकार एमएसीपी में भी यही प्रावधान लागू रहेगा।

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