मदर्स डे विशेष : मां केवल परिवार की मूल धुरी नहीं, वह प्रेम, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण की भी आधारशिला
मां ने अपने जिन बेटे-बेटियों को पहुंचाया इतने ऊंचे पदों पर कि उन्होंने कभी कल्पना न की
भारतीय संस्कृति में मां को प्रथम गुरु का स्थान दिया गया। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व, संस्कार, संघर्ष और सफलता के पीछे उसकी मां की प्रेरणा, त्याग और मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
जयपुर। भारतीय संस्कृति में मां को प्रथम गुरु का स्थान दिया गया है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व, संस्कार, संघर्ष और सफलता के पीछे उसकी मां की प्रेरणा, त्याग और मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा जैसे उच्च पदों पर पहुंचे व्यक्तित्वों की उपलब्धियों के पीछे उनकी माताओं का मौन लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन सभी महान हस्तियों की सफलता यह सिद्ध करती है कि मां केवल परिवार की धुरी नहीं होती, बल्कि वह समाज और राष्ट्र निर्माण की भी आधारशिला होती है।
मां के संस्कारों से मिली सफलता की ऊंची उड़ान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को उनकी मां गोमती देवी के संस्कारों से सफलता की ऊंची उड़ान मिली है। मुख्यमंत्री के अनुसार मां की वजह से ही उनका जीवन जनसेवा का उदाहरण माना जाता है। साधारण परिवार से निकलकर प्रदेश के सवार्ेच्च पद तक पहुंचने की यात्रा आसान नहीं थी। इसमें माता से दिए गए संस्कारों की भूमिका रही। भजनलाल शर्मा को माता ने बचपन से ही अनुशासन और समाज सेवा की शिक्षा दी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने पुत्र को कभी निराश नहीं होने दिया।
हर बड़ी कामयाबी के पीछे मां का आशीर्वाद
उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा के अनुसार उनकी मां का निधन उस समय हो गया था, जब वे स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। उनके स्कूल से लौट कर आने पर घर पर मिला मां का प्यार और दुलार उनको आज भी याद है। उनकी मां का जीवन भी संघर्ष और सामाजिक उत्थान की प्रेरक कहानी है। उनकी माता ने कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और आत्मविश्वास का महत्व समझाया। मां की प्रेरणा से ही उन्होंने शिक्षा प्राप्त की, सामाजिक कायार्ें में सक्रियता दिखाई और राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
मेरे सफल जीवन में मां का बड़ा योगदान
मे री माताजी उर्मिला माहेश्वरी का मेरे सफल जीवन में बहुत बड़ा योगदान रहा है। माताजी पेशे से शिक्षिका रही और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। उन्होंने दिन रात मेहनत कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाई और आज मुझे डॉक्टर्र बनने के लिए प्रेरित किया। बचपन से ही मेरी माताजी ने मुझे शिक्षा का महत्व समझाया और उनका सपना था कि मैं डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करूं। आज उन्हीं के आशीर्वाद, समर्पण और त्याग का परिणाम है कि मैं आज एक सफल चिकित्सक बनकर मरीजों की सेवा कर रहा हूं और वर्तमान में एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की अहम जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा हूं। मेरी माताजी की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि मां का आशीर्वाद और संघर्ष किसी भी सपने को साकार कर सकता है।
-डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्रिंसिपल,
एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर।
मां से सीखा समर्पण और ईमानदारी
मे री माताजी डॉ. नीरजा पाटनी ग्रोवर जो स्वयं एक चिकित्सक रहीं और सीजीएचएस जयपुर की प्रभारी के रूप में कार्य कर चुकी हैं। मेरे जीवन और व्यक्तित्व की सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। उन्हें समर्पण, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ रोगियों की सेवा करते हुए देखकर मैंने समझा कि चिकित्सा केवल दवाइयों, ऑपरेशन या पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है। उन्होंने मुझे सिखाया कि एक अच्छे डॉक्टर बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना आवश्यक है। उनका मानना था कि चिकित्सा विज्ञान का संबंध केवल शरीर से नहीं, मानवीय संवेदनाओं से भी होता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा भाव निरंतर जारी है। आज भी वे श्रवण बाधित बच्चों के पुनर्वास कायार्ें से जुड़ी हुई हैं। यह उनकी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।
-डॉ. मोहनीश ग्रोवर, प्रिंसिपल, राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंसेज, जयपुर।

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