तरुण तेजपाल की सजा पर कांग्रेस की चुप्पी को लेकर भाजपा का हमला, सुधांशु त्रिवेदी बोले- रिश्तों पर स्थिति साफ करे कांग्रेस
सोनिया गांधी के पुराने पत्र का जिक्र
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तहलका मैगजीन के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल की सजा पर कांग्रेस नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए तहलका मैगजीन और तेजपाल से संबंधों को लेकर कांग्रेस से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अभी हाल ही में तहलका मैगज़ीन के प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे उच्च न्यायालय की गोवा खंडपीठ ने 2013 के दुष्कर्म के एक मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनायी। उन्होंने कहा कि यह विषय आज इसलिए महत्वपूर्ण है कि इतने दिन गुजर जाने के बाद भी कांग्रेस की तरफ से इस मुद्दे पर एक भी शब्द सुनाई नहीं पड़ा है। न ही किसी विपक्षी दल की ओर से और न ही स्वयं को नारी हितों का स्वयंभू रक्षक बताने वाले किसी भी संस्थान ने कुछ कहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में निचली अदालत से बरी होने के बाद तेजपाल ने दुष्कर्म के इस मामले में मदद के लिए कांग्रेस का शुक्रिया अदा किया था।
त्रिवेदी ने कहा कि यह दर्शाता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो या नारी की प्रताड़ना ,इन विषयों पर इनकी सोच कितनी एकांगी, एकपक्षीय और पूर्वाग्रहग्रस्त है। उन्होंने कहा कि तहलका वही व्यावसायिक घराना है, जिसने एक विचित्र प्रकार का स्टिंग ऑपरेशन किया था। उन्होंने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने न्यायाधीश फूकन की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया, तो यह एक ऐसा अवसर था जब स्टिंग करने वाले समूह ने पूरे टेप को सत्यापित करने के लिए देने से मना कर दिया था। इससे ज्यादा संदेह और उत्पन्न नहीं हो सकता।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जब जांच की रिपोर्ट आई, तब तक सरकार बदल चुकी थी और कांग्रेस सरकार ने उस जांच रिपोर्ट को सदन के पटल पर कभी रखा ही नहीं। उन्होंने कहा, " भाजपा के विषय उठाने पर सरकार द्वारा 41 पेज की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गयी थी और आज जब वह दोषी सिद्ध हो चुके हैं, तो मैं याद दिलाना चाहता हूं कि इनका और कांग्रेस का क्या संबंध है।" उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के समय में कांग्रेस की सर्वोच्च नेता सोनिया गांधी जी ने 25–27 सितंबर 2004 को तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम साहब को पत्र लिखा कि तहलका और उसके वित्त पोषकों के साथ किसी प्रकार की प्रताड़ना नहीं होनी चाहिए। उनके साथ सकारात्मक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा, " मैं आज कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि क्या उस समय आपकी सरकार अनुचित व्यवहार कर रही थी?"
उन्होंने कहा कि 2010 में तत्कालीन विधि मंत्री वीरप्पा मोइली ने इन्हें पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार किया था। आज इनकी यह स्थिति है और आपके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा था कि उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों के ख़िलाफ़ लड़ाई में बेहतरीन काम किया है।

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