जमीन के विवाद में अटकी श्मशान घाट की सुविधाएं

न टीनशेड है, न बैठने की व्यवस्था

 जमीन के विवाद में अटकी श्मशान घाट की सुविधाएं
बारिश में अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को उठानी पड़ती है परेशानी।

सांगोद। आजादी के 78 वर्ष बाद भी जिले के दूसरे सबसे बड़े उपखंड सांगोद के कई गांव बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। सांगोद पंचायत समिति के काशीपुरा गांव में स्थिति ऐसी है कि ग्रामीणों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार भी सम्मानजनक तरीके से कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गांव के श्मशान घाट पर न टीनशेड है, न बैठने की व्यवस्था और न ही बारिश से बचाव के लिए कोई स्थायी इंतजाम। बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

ग्रामीणों के अनुसार बारिश होने पर श्मशान घाट में रखी लकड़ियां भीग जाती हैं, जिससे चिता जलाने में काफी परेशानी होती है। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को खुले आसमान के नीचे बारिश में खड़े रहना पड़ता है। कई बार ग्रामीण तिरपाल बांधकर किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करते हैं। ऐसे में जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों को खल रहा है।

प्रशासन से कई बार लगा चुके हैं गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट पर टीनशेड सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कई बार ग्राम पंचायत एवं प्रशासन के समक्ष रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। बारिश के मौसम में हर बार यही स्थिति सामने आती है और किसी परिवार में मृत्यु होने पर परिजनों को दुख की घड़ी में अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने श्मशान घाट पर टीनशेड, पक्का चबूतरा, पानी की व्यवस्था और पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी जरूरी व्यवस्था के लिए ग्रामीणों को मौसम की मार नहीं झेलनी पड़े, इसके लिए जरूरी है।

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काशीपुरा में श्मशान घाट केलिएजिस भूमि का आवंटन किया गया था, वह वर्तमान में विवादित है। भूमि विवाद के चलते वहां विकास कार्य नहीं कराए जा सके हैं। राजस्व विभाग की ओर से वैकल्पिक भूमि आवंटित किए जाने के बाद श्मशान घाट का निर्माण एवं वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की कार्रवाई की जाएगी।
- सूरज वर्मा, ग्राम विकास अधिकारी, काशीपुरा

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