बिगड़ती अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए आर्थिक नीति में बदलाव जरूरी, जयराम बोले- चंदा लो, धंधा दो की संस्कृति से स्वतंत्र निवेश की भावना कमजोर
कांग्रेस लंबे समय से इन मुद्दों को उठाती रही
रमेश ने कहा कि देश में निवेश माहौल कमजोर है। महंगाई बढ़ रही है, विकास दर घट रही है और एफडीआई में गिरावट है। निजी निवेश ठप है क्योंकि मजदूरी स्थिर, मांग कमजोर, नीतिगत अस्थिरता और कर-छापों का दबाव है। चीनी डंपिंग व कॉरपोरेट एकाधिकार से विनिर्माण प्रभावित है।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा कि कमजोर निवेश माहौल और बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए देश की अर्थव्यवस्था में सुधार जरूरी है और इसके लिए आर्थिक नीति में तत्काल व्यापक बदलाव करने की महती आवश्यकता है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर माहौल इतना खराब हो गया है कि सरकार के समर्थक भी अब सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त करने लगे हैं। उन्होंने दावा किया कि मुद्रास्फीति के अनुमान तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि आर्थिक विकास दर के अनुमान घट रहे हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में गिरावट जारी है और आपूर्ति शृंखला के कुप्रबंधन की स्थिति ऐसी हो गयी है कि प्रधानमंत्री को खुद उपभोक्ताओं से खपत कम करने की अपील करनी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से इन मुद्दों को उठाती रही है और इनमें सबसे महत्वपूर्ण कमजोर निवेश माहौल है। उनका कहना था कि निजी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि के बिना आर्थिक विकास को तेज और टिकाऊ नहीं बनाया जा सकता, लेकिन वास्तविक मजदूरी में ठहराव, उपभोक्ता मांग में कमी, नीतिगत अस्थिरता, कर नोटिस, छापों और जांच एजेंसियों के दबाव के कारण निवेश का माहौल प्रभावित हुआ है। रमेश ने आरोप लगाया कि चीन से सस्ते आयात की डंपिंग ने विनिर्माण क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया है तथा सरकार समर्थित कारोबारी एकाधिकार और 'चंदा लो, धंधा दो की संस्कृति ने स्वतंत्र निवेश की भावना को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट कर दरें रिकॉर्ड निचले स्तर पर हैं और कंपनियों की कमाई बढ़ रही है, लेकिन निवेश में गति नहीं दिख रही है जबकि कई बड़े निवेशक विदेशों में निवेश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को आत्मप्रशंसा छोड़कर आर्थिक नीति में व्यापक बदलाव करने चाहिए।

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