कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला : भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति पर उठाए सवाल, जयराम बोले- देश ने गंवाया अपने राजनयिक नेतृत्व को साबित करने का अवसर

तचीत दुनिया के सबसे अशांत क्षेत्रों में से एक में तनाव कम कर सकती है

कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला : भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति पर उठाए सवाल, जयराम बोले- देश ने गंवाया अपने राजनयिक नेतृत्व को साबित करने का अवसर
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता की आहट पर कांग्रेस ने शांति की उम्मीद जताई, लेकिन केंद्र की विदेश नीति पर सवाल उठाए। जयराम रमेश ने पाकिस्तान की भूमिका, अमेरिका संग संबंधों और ब्रिक्स में भारत की निष्क्रियता को घेरा। उन्होंने कहा, बदलते भू-राजनीतिक हालात में भारत ने रणनीतिक मौके गंवाए, जबकि पश्चिम एशिया में जल्द स्थिरता जरूरी है।

नई दिल्ली। इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की आहट के बीच कांग्रेस पार्टी ने शांति की संभावनाओं पर सावधानी भरी उम्मीद जतायी है। साथ ही पार्टी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला करते हुए तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाये हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा कि इस बैठक से भारत सहित वैश्विक स्तर पर यह उम्मीद जगी है कि यह अमेरिका-ईरान के बीच टिकाऊ शांति प्रक्रिया की शुरुआत हो सकती है। उन्होंने हालांकि सतर्क किया कि इन कोशिशों को पड़ोस में इजरायल की जारी आक्रामकता से पटरी से नहीं उतरना चाहिए।

रमेश ने इस अवसर का उपयोग सरकार के राजनयिक दृष्टिकोण में विसंगतियों और चूके अवसरों पर सवाल उठाने के लिए किया और केंन्द्र सरकार व उनकी संपर्क रणनीतियों पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता ने इस बातचीत के मेजबान के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सवाल किया कि अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में कथित संलिप्तता और उसे अलग-थलग करने के भारत के राजनयिक प्रयासों के बावजूद इस्लामाबाद अपने लिए नयी भूमिका गढ़ने में कैसे कामयाब रहा। उन्होंने वर्तमान स्थिति की तुलना 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद के समय से की और कहा कि तब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने पाकिस्तान को बहुत प्रभावी ढंग से अलग-थलग कर दिया था।  रमेश ने अमेरिका के साथ भारत के जुड़ाव पर भी सवाल उठाये और तर्क दिया कि व्यापक सार्वजनिक कूटनीतिक प्रयासों, जिनमें हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम और राजनीतिक संदेश शामिल हैं, उसके बावजूद सरकार रणनीतिक लाभ हासिल करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने पूरी तरह से एकतरफा व्यापार समझौते पर सहमति जता दी, जबकि बदले में उसे बहुत कम हासिल हुआ। यहां तक कि अमेरिका ने पाकिस्तान को फिर से एक नयी राजनयिक भूमिका दे दी है।

इसके अलावा उन्होंने ब्रिक्स में भारत की वर्तमान नेतृत्व स्थिति का उपयोग शांति या मध्यस्थता के प्रयासों को शुरू करने के लिए न करने पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे प्रमुख क्षेत्रीय देश इस समूह के सदस्य हैं। उन्होंने सवाल किया, भारत ने कोई शांति पहल क्यों नहीं शुरू की? उन्होंने संकेत दिया कि भारत ने अपने राजनयिक नेतृत्व को साबित करने का एक अवसर गंवा दिया है। रमेश ने चीन के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर भी चिंता जतायी और पिछले अठारह महीनों के दौरान इसे नपे-तुले आत्मसमर्पण के रूप में वर्णित किया। उन्होंने इसे पाकिस्तान के प्रति चीन के निरंतर समर्थन से जोड़ा।

व्यापक हितों पर जोर देते हुए, कांग्रेस नेता ने पश्चिम एशिया में स्थिरता की तत्काल बहाली का आह्वान किया। उन्होंने कहा, Þपश्चिम एशिया में शांति जल्द लौटनी चाहिएऔर साथ ही यह भी जोड़ा कि हालिया संघर्षों के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य होनी चाहिए। यह बयान सरकार की विदेश नीति के विमर्श को चुनौती देने के कांग्रेस पार्टी के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है, जबकि दुनिया की निगाहें इस बात पर केंद्रित है कि क्या इस्लामाबाद बातचीत दुनिया के सबसे अशांत क्षेत्रों में से एक में तनाव कम कर सकती है।

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