राज्यसभा में उठी 13 वर्षो से ठप पड़ी राष्ट्रीय एकता परिषद को सक्रिय करने और इसकी बैठक बुलाने की मांग, समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने बोला तीखा हमला
राज्यसभा में राष्ट्रीय एकता परिषद को पुनर्जीवित करने की मांग
राज्यसभा में राष्ट्रीय एकता परिषद को 13 साल बाद सक्रिय करने, आईटी रोजगार संकट, किसानों की दिक्कतें, छावनी चुनाव, फर्जी प्रमाणपत्र और महंगे इलाज जैसे मुद्दे उठे।
नई दिल्ली। पिछले 13 वर्षों से ठप पड़ी राष्ट्रीय एकता परिषद् को सक्रिय करने और इसकी बैठक बुलाने की मांग सोमवार को राज्यसभा में की गयी। समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने वर्ष 1961 मेंं राष्ट्रीय एकता परिषद का गठन किया था। इस परिषद का कार्य राष्ट्रीय एकता के विषयों पर सरकार को सलाह देना था।
उन्होंने कहा, करीब सवा सौ सदस्यों वाली इस परिषद में प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं और राज्यों के मुख्यमंत्री उसके सदस्य होते हैं । इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, पत्रकार और शिक्षाविद आदि भी इसके सदस्य होते हैं। उन्होंने कहा कि यह परिषद समान नागरिकता और धार्मिक सछ्वावना जैसे जीवन का आधार माने जाने वाले मूल्यों पर विचार विमर्श के बाद सलाह देती थी। उन्होंने कहा कि अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आज इन मूल्यों पर हमला हो रहा है। यह परिषद इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है लेकिन पिछले 13 वषों से इसकी कोई बैठक नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस परिषद को दोबारा सक्रिय करने का निर्देश दिया जाना चाहिए जिससे कि जीवन का आधार माने जाने वाले मूल्यों की रक्षा की जा सके। काग्रेस के अशोक सिंह ने देश में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों में कर्मचारियों की भर्ती में कमी और उनके वेतन का मुद्दा उठाया । उन्होंने कहा कि इन कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या निरंतर कम हो रही है और कालेजों में होने वाले परिसर प्लेसमेंट में भी कमी आई । उन्होंने कहा कि जिन छात्रों को नियुक्ति पत्र मिले हैं उन्हें ज्वाइन नहीं कराया जा रहा। सदस्य ने कहा कि एआई के कारण कंपनी 25 प्रतिशत कम कर्मचारियों के साथ काम कर रही हैं और वेतन ढांचा कई वर्षों से वही बना हुआ है और इसमें बढोतरी नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि केवल डिजिटल नारों से युवाओं का कल्याण नहीं हो सकता और सरकार को एक इस बारे में श्वेत पत्र लाना चाहिए
भाजपा के सतपाल शर्मा ने छावनी बोर्डों के काफी समय से लंबित चुनावों को जल्द कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इसके कारण छावनी क्षेत्रों में विकास और बुनियादी कार्य लटके पड़े हैं। उन्होंने पारदर्शिता बढाने के लिए छावनी बोर्ड अधिनियम में सुधार किये जाने की मांग की। भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर उनके हक छीने जा रहे हैं। उनकी आरक्षण की सुविधा भी प्रभावित हो रही है। नौकरियों पर नकली लोग पदों पर कब्जा कर रहे हैं।
बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने किसानों की समस्या का मुद्दा उठाया और कहा कि उन्हें विभिन्न तरह की दिक्कतों का सामाना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मंडियों में खरीद नहीं हो पा रही है विशेष रूप से धान की खरीद बहुत अधिक प्रभावित है जिससे किसानों को सस्ते दाम अपनी उपज बेचनी पड़ रही है।
अन्नाद्रमुक के एम धनपाल ने लोगों की सेवा और समाज कल्याण में योगदान के लिए तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता को भारत रत्न दिये जाने की मांग की। आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने निजी अस्पतालों में दिनों दिन महंगे होते जा रहे उपचार और मरीजों की समस्याओं को उठाया।

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