केन्द्र के इशारों पर काम कर रहा चुनाव आयोग, सरकार के हाथों की कठपुतली बना : प्रियांक

एसआईआर को बताया सत्ताधारी दल को सत्ता में बनाए रखने की कवायद

केन्द्र के इशारों पर काम कर रहा चुनाव आयोग, सरकार के हाथों की कठपुतली बना : प्रियांक
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने चुनाव आयोग पर केंद्र सरकार के इशारों पर काम करने और 'कठपुतली' बनने का आरोप लगाया। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को राजनीतिक कवायद बताते हुए कहा कि कांग्रेस की 12 कानूनी व संवैधानिक आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। खड़गे ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सॉफ्टवेयर ऑडिट की मांग की।

बेंगलुरु। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर केन्द्र सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह केन्द्र सरकार के हाथों की कठपुतली बन गया है। उन्होंने मतदाता सूची की चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को सत्ताधारी दल को सत्ता में बनाए रखने की एक विशेष राजनीतिक कवायद बताया।  खरगे ने संवाददाताओं से बात करते हुए इस संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते समय आयोग ने कर्नाटक सरकार द्वारा उठाए गए गंभीर कानूनी और संवैधानिक आपत्तियों को नजरंदाज किया।

उन्होंने आरोप लगाया, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग केन्द्र सरकार के हाथों की कठपुतली हैं। यह बिलकुल साफ है कि जनता के बीच केन्द्र सरकार को जन-समर्थन हासिल नहीं है। इसीलिए वे सत्ता में बने रहने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण के तरीके पर 12 आपत्तियां दर्ज कराई थीं और उम्मीद की थी कि चुनाव आयोग कर्नाटक के मुख्य सचिव द्वारा औपचारिक रूप से बताई गई चिंताओं का जवाब देगा। उन्होंने कहा, हमने 12 स्पष्ट आपत्तियां उठाई थीं और उम्मीद कर रहे थे कि हमारे मुख्य सचिव ने जो लिखा था, उस पर चुनाव आयोग जवाब देगा। दुर्भाग्य से उन्होंने ऐसा नहीं किया।

खड़गे के अनुसार इन आपत्तियों में कानूनी, संवैधानिक और प्रक्रियात्मक मुद्दे शामिल थे, जिनमें मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता भी शामिल थी। उन्होंने कहा, हमने कानूनी और संवैधानिक सवाल उठाए हैं। हमने उनसे पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने, इसे पारदर्शी बनाने, सॉफ्टवेयर ऑडिट पारदर्शी तरीके से कराने और पूरी कवायद को पारदर्शिता के साथ पूरा करने के लिए कहा है। दुर्भाग्य से उन्होंने जवाब न देने का फैसला किया। हम स्थिति का आकलन करेंगे और आने वाले दिनों में अपनी आगे की कार्रवाई तय करेंगे। कर्नाटक के गृहमंत्री ने सत्यापन के लिए मतदाताओं की पहचान करने के आधार पर भी सवाल उठाए और 'तार्किक विसंगति' शब्द के इस्तेमाल की आलोचना की, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है।

 

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