एसआईआर के नाम पर लोकतंत्र का बनाया मजाक : ममता बनर्जी ने गृहमंत्री को दी खुली चुनौती, कहा- खुद आकर देखें किस तरह लोगों से छीना मतदान का अधिकार
अनुसूचित जनजातियों और अन्य वंचित वर्गों को किया वंचित
मालदा में रैली के दौरान ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया को “लोकतंत्र का मजाक” बताते हुए अमित शाह को खुली चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों व वंचित वर्गों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है। बनर्जी ने कानूनी लड़ाई जारी रखने और प्रभावित मतदाताओं को न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
मालदा। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो एवं पश्चित बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के नाम पर लोकतंत्र का मजाक बनाकर रख दिए जाने का आरोप लगाया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह खुद आकर देखें कि मालदा जिले में किस तरह लोगों से उनके मतदान का अधिकार छीना गया है। मालदा के मानिकचक में आज चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने गृहमंत्रभ् पर सीधा हमला बोला और कहा, यहां आइए और खुद देखिए कि कैसे लोगों के वोट देने का अधिकार छीन लिया गया है। चुन-चुनकर मुसलमानों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य वंचित वर्गों को इससे वंचित किया गया है। मैं आपको जमीनी हकीकत देखने की चुनौती देती हूं।
अपने हमले को और तेज करते हुए बनर्जी ने गृहमंत्री पर केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग कर बड़ी साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, सभी साजिशें उन्हीं के इशारे पर रची जा रही हैं। हमारी पार्टी के उम्मीदवारों को परेशान करने के लिए ईडी, सीबीआई और एनआईए का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसियां उनकी पार्टी के नेताओं को राजनीतिक मकसद से समन भेज रही हैं और उन्हें डराया जा रहा है। उन्होंने कहा, उन्हें डर है कि कम सीटें मिलेंगी। इसलिए वे हमारे जीतने वाले उम्मीदवारों को भाजपा का समर्थन करने के लिए प्रभावित करने की कोशिश करेंगे। इसीलिए इन एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अपना आक्रामक रुख जारी रखते हुए बनर्जी ने चेतावनी दी, गृहमंत्री तैयार रहिये। आप बैठकर बंगाल पर कब्जा करने की योजना बना रहे होंगे, लेकिन आपके पतन की शृंखला 2026 में दिल्ली से शुरू होगी।
अपने संबोधन में बनर्जी ने जनसभा में मौजूद लोगों से यह बताने को कहा कि क्या एसआईआर प्रक्रिया के तहत उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये हैं। जैसे ही बड़ी संख्या में हाथ ऊपर उठे, उन्होंने टिप्पणी की कि लोगों को बाहर करने का यह पैमाना चिंताजनक है। उन्होंने निर्देश दिया कि इस पल को सबूत के तौर पर रिकॉर्ड किया जाये। बड़े पैमाने पर मताधिकार छीने जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र के निर्देशों के बाद मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को चुन-चुनकर सूची से बाहर कर दिया गया है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर लोगों के वोट देने के अधिकार छीन रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को प्रभावित नागरिकों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने लोगों से संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जरूरत पर जोर देते हुए लोकतांत्रिक माध्यमों से बदलाव लाने का आग्रह किया। विरोध दबाने के लिए संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इस तरह से काम कर रहा है, जिससे विरोध को हतोत्साहित किया जा सके। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे उन लोगों का विवरण एकत्र करें, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये हैं और कानूनी कार्रवाई के लिए उन दस्तावेजों को कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय में जमा करें। मतदान के अधिकार बहाल करने का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा, मैं लड़ रही हूं और लड़ती रहूंगी। उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित हैं और यह लड़ाई जारी रहेगी। मुझ पर भरोसा रखें, जिस तरह अपने नाम कटने से आप दुखी हैं, मैं भी आपके उसी दर्द को महसूस करती हूं। यह लड़ाई जारी रहेगी और हर नाम को वापस सूची में जोड़ा जायेगा।
मोथाबाड़ी की घटना का जिक्र करते हुए बनर्जी ने न्यायाधीशों के घेराव और उन पर हुए कथित हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस घटना के पीछे दो सांप्रदायिक ताकतेंÞ थीं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) स्थानीय निर्दोष लोगों को बिना किसी भेदभाव के उठाकर और गिरफ्तार कर परेशान कर रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के मुद्दे पर सुश्री बनर्जी ने कहा कि अब उनकी पार्टी को चुनाव प्रचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि लोगों ने पहले ही तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में अपना मन बना लिया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे प्रभावित मतदाताओं की सहायता करें और ट्रिब्यूनल के समक्ष आवश्यक दस्तावेज पेश करने में उनकी मदद करें।

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