पंजाब विधानसभा में मिनट का सत्र, कई सवाल… अब भगवंत मान से इस्तीफे की मांग
सत्ता बदली तो खुलेगी फाइलें
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने गुरुवार को राज्य विधानसभा का सत्र महज नौ मिनट में समाप्त किए जाने को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परमिंदर सिंह झोटा हत्याकांड समेत जनहित से जुड़े अहम् मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। सिंह ने कहा कि पंजाब में सरकारी कर्मचारी, कंप्यूटर शिक्षक, ईटीटी शिक्षक और पीआरटीसी कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनसे बचने का रास्ता अपना रही है। उन्होंने राज्य में प्रशासनिक अव्यवस्था और जवाबदेही की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब को दिल्ली से चलाने वाले लोग अब राजनीतिक रूप से पीछे हट गए हैं, लेकिन राज्य को हुए नुकसान की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस की सरकार बनने पर पंजाब के हितों को नुकसान पहुंचाने और लोगों के साथ अन्याय करने वालों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की संख्या 125 से 150 के बीच हो सकती है और किसी को छोड़ा नहीं जाएगा। कांग्रेस नेता ने विधानसभा सत्र से पहले जारी श्रद्धांजलि सूची में नशों के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा और हादसे में जान गंवाने वाले मनरेगा मजदूरों के नाम शामिल नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि हादसे में एक गर्भवती महिला समेत आठ लोगों के घायल होने के मामले को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सूची में छूट गए लोगों को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए और लापरवाही की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
झोटा के मामले का जिक्र करते हुए सिंह ने दावा किया कि वर्ष 2023 में सिग्नेचर कैप्सूल पकड़े गए थे, लेकिन पिछले पांच वर्षों से इनके नाम बदलकर बिक्री किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि झोटा की हत्या वाले दिन छह दुकानों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें बंद किया गया था। उन्होंने इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पांच गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे आरोपी को हथियार का लाइसेंस कैसे जारी किया गया। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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