अपमानित होने पर जगदीप धनखड़ ने जाहिर की पीड़ा, कहा- संवैधानिक रूप से उच्च पदस्थ व्यक्तियों पर बिना किसी पश्चाताप के लगाए आरोप
सभापति से उनका संरक्षण करने की मांग की थी
दन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापटल पर आवश्यक दस्तावेज रखे जाने के बाद कही। उस वक्त नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सभापति से उनका संरक्षण करने की मांग की थी।
नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को सदन में एक बार फिर से अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा, हमें उस स्तर तक नहीं जाना चाहिए कि खुद के घर में आग लगे तभी बोलें। हालात यह हो गए कि संवैधानिक रूप से उच्च पदस्थ व्यक्तियों पर बिना किसी पश्चाताप के आरोप लगाए गए हैं। धनखड़ ने याद दिलाया कि सभी दलों को यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि वह कैसे सुधार करें और अपनी प्रतिष्ठा कैसे बचाएं। असल में, धनखड़ ने यह बातें सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापटल पर आवश्यक दस्तावेज रखे जाने के बाद कही। उस वक्त नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सभापति से उनका संरक्षण करने की मांग की थी।
धनखड़ ने कहा कि सभापति के रूप में उन्होंने अत्यंत संयम बरता है। बल्कि प्रधानमंत्री सहित संवैधानिक रूप से उच्च पदस्थ व्यक्तियों पर बिना किसी पश्चाताप के आरोप लगाए गए हैं। इसी सदन में कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश ने सभापति के खिलाफ सबसे घिनौना आरोप लगाया है कि सभापति मुद्दे को भटका रहे हैं। जयराम रमेश ने सभापति को चीयरलीडर कहा था। धनखड़ ने कहा कि आप मेरी पीड़ा की कल्पना कीजिए। जब एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इस सदन के पवित्र परिसर में अध्यक्ष की नकल का वीडियो बनाया। सभापति ने बताया कि भाजपा सांसद घनश्याम तिवारी की अध्यक्षता में आचार समिति बनाकर एक तंत्र विकसित करने को कहा है। ताकि सदस्यों को परामर्श दिया जा सके। धनखड़ ने याद दिलाया कि आप भारत के राष्ट्रपति तक की अवमानना कर लेते हैं। वह पहली आदिवासी महिला हैं। इस पद तक पहुंची हैं। और दुर्भाग्य यह है कि यह अभिव्यक्तियां सामान्य सदस्यों ने नहीं दी हैं। इन आरोपों का स्रोत राजनीतिक नेतृत्व है।
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