ईरान के साथ विवाद सुलझाने के लिए समय-सीमा तय करना मुश्किल : राष्ट्रपति ट्रंप
संघर्ष विराम अब मान्य नहीं, वार्ता जारी
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ विवाद को सुलझाने के लिए समय-सीमा तय करना मुश्किल है। ट्रंप ने शुक्रवार को 'रियल अमेरिकाज़ वॉयस' से कहा, "यह हमेशा मुश्किल होता है। हमने वेनेजुएला का मामला एक दिन से भी कम समय में निपटा लिया था। उसमें हमारा कोई नुकसान नहीं हुआ था। ईरान के मामले में, परिभाषाओं के आधार पर कहें तो, 16-18 लोग (प्रभावित हुए हैं)।"
उन्होंने माना कि चल रहे विवाद के दौरान ईरान उनकी पिछली सोच की तुलना में कहीं ज़्यादा कड़ा प्रतिद्वंद्वी साबित हुआ है। कैंप डेविड से बात करते हुए श्री ट्रंप ने कहा, "उनके पास न तो नौसेना है और न ही वायुसेना। ज़्यादातर लोग हार मान लेते। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, इसलिए मैं उन्हें इसका श्रेय देता हूं।" उनसे पूछा गया था कि इस्लामिक रिपब्लिक की क्षमताओं को कमज़ोर करने के लिए और कितने हमले करने होंगे।
उन्होंने आगे कहा, "वे बहुत सख्त माने जाते हैं। वे वाकई सख्त हैं।" ट्रंप ने उन अधिकारियों के नाम बताए जो अभी ईरान के साथ बातचीत में शामिल हैं, जिनमें विशेष दूत स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल हैं। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "स्टीव बात कर रहे हैं, जेरेड... जेडी बहुत मज़बूती से शामिल हैं... मार्को भी शामिल हैं।" पेंटागन के 'डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम' के अनुसार, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में मारे गए सैनिकों की संख्या 14 है। पेंटागन ने यह भी बताया कि "विदेशी अभियानों" में चार सैनिक मारे गए।
तेहरान और वॉशिंगटन ने 18 जून की रात एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें 28 फरवरी से शुरू हुए विवाद को खत्म करने की बात कही गई थी। हालांकि, 8 जुलाई के बाद से अमेरिकी सेना ने ईरान पर कई बार हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के खिलाफ ईरान की कार्रवाई के जवाब में किए गए थे। ईरानी सेना ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके जवाब दिया। ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक के बीच हुआ संघर्ष-विराम अब मान्य नहीं है।

Comment List