गर्भवती महिलाओं के लिए रेफरल परिवहन तंत्र होगा मजबूत, हाई रिस्क मामलों की होगी विशेष निगरानी
उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने के निर्देश
जयपुर। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सुरक्षित मातृत्व सेवाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए रेफरल परिवहन तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने सुरक्षित प्रसव और जननी एक्सप्रेस सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ परिपत्र जारी करने तथा हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से एक-दो दिन पहले ही उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने मातृ मृत्यु के मामलों, एनीमिया, हाईपरटेंशन, रक्त उपलब्धता, 104 एवं 108 एम्बुलेंस सेवाओं तथा उपचार व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की।
उन्होंने भीलवाड़ा में हाल ही में हुई मातृ मृत्यु के मामले की जानकारी लेकर संबंधित चिकित्सकों से सीधे संवाद किया। उन्होंने निर्देश दिए कि एनीमिया और हाईपरटेंशन के उपचार एवं प्रबंधन के लिए पूरे प्रदेश में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की जाए। ब्यावर, चित्तौड़गढ़, बारां, झालावाड़ और सलूम्बर में स्क्रीनिंग एवं उपचार पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि रक्त की कमी के कारण किसी भी गर्भवती महिला की मृत्यु नहीं होनी चाहिए और आवश्यकता वाले क्षेत्रों में विशेष रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएं। बैठक में प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ सहित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

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