मेडिकल डिवाइस कंपनियों को बड़ी राहत: सरकार ने नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा, अनुपालन लागत और मंजूरी समय होगा कम
कारोबार सुगमता और पारदर्शिता पर जोर
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए मेडिकल डिवाइस रूल्स, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना, परीक्षण शुल्क में एकरूपता लाना और पात्र मेडिकल उपकरणों को भारतीय बाजार में तेजी से उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों में तीन प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें मेडिकल डिवाइस की आउटसोर्स्ड स्टरलाइजेशन प्रक्रिया को सरल बनाना, मेडिकल डिवाइस टेस्टिंग के लिए समान शुल्क निर्धारित करना तथा उन मेडिकल डिवाइस के लिए क्लिनिकल जांच की आवश्यकता में छूट देने वाली मान्यता प्राप्त नियामकीय व्यवस्थाओं में यूरोपीय संघ को शामिल करना शामिल है, जिनका कोई पूर्वानुमान उपकरण उपलब्ध नहीं है।
मेडिकल डिवाइस रूल्स, 2017 के नियम 44 में प्रस्तावित बदलाव के तहत जिन निर्माता कंपनियों के पास अपनी स्टरलाइजेशन सुविधा नहीं है और वे लाइसेंस प्राप्त बाहरी सुविधा से स्टरलाइजेशन कराती हैं, उन्हें अलग से लोन लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, संबंधित स्टरलाइजेशन सुविधा के पास मेडिकल डिवाइस नियमों के तहत वैध लाइसेंस होना जरूरी होगा। इससे अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं, दस्तावेजी प्रक्रिया, मंजूरी में लगने वाले समय और लागत में कमी आने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित सुधारों से नियामकीय प्रक्रियाएं सरल होंगी, अनुपालन लागत घटेगी और व्यवस्था में पारदर्शिता तथा पूर्वानुमेयता बढ़ेगी। साथ ही, इन बदलावों से मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नियामकीय मानकों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कारोबार सुगमता से जुड़े इन सुधारों के साथ मेडिकल डिवाइस की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन के उच्च मानकों को बनाए रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि ये संशोधन देश में मेडिकल डिवाइस के नियामकीय ढांचे को मजबूत करने और उन्नत चिकित्सा तकनीकों की उपलब्धता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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