AIIMS की पॉपुलेशन क्लॉक भारत की लाइव आबादी नहीं गिनती, डेमोग्राफिक आंकड़ों से हर सेकंड बदलता है अनुमानित आंकड़ा
जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर आबादी का अनुमान
नई दिल्ली। AIIMS दिल्ली में लगी एक डिजिटल पॉपुलेशन क्लॉक इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। स्क्रीन पर भारत की आबादी का आंकड़ा लगातार बदलता दिखाई देता है, जिससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश में हर जन्म की जानकारी AIIMS को तत्काल मिलती है। हालांकि, ऐसा नहीं है। यह घड़ी भारत में होने वाले हर जन्म को लाइव ट्रैक नहीं करती, बल्कि उपलब्ध जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर आबादी का अनुमान प्रदर्शित करती है।
भारत में जन्म और मृत्यु के आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) मौजूद है। इसके तहत जन्म और मृत्यु जैसी घटनाओं का पंजीकरण किया जाता है। हालांकि, यह व्यवस्था देश की आबादी का हर सेकंड अपडेट होने वाला राष्ट्रीय काउंटर नहीं है। पॉपुलेशन क्लॉक किसी निर्धारित समय की अनुमानित आबादी और जन्म, मृत्यु जैसे जनसांख्यिकीय बदलावों की दर को आधार बनाकर भविष्य के आंकड़े तैयार करती है। वार्षिक अनुमान को महीनों, दिनों और सेकंड में बांटकर डिजिटल स्क्रीन पर लगातार बदलता आंकड़ा दिखाया जाता है।
भारत की आखिरी पूरी जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें आबादी करीब 121.1 करोड़ दर्ज की गई थी। ऐसे में घड़ी पर संख्या बढ़ने का अर्थ किसी खास समय पर किसी बच्चे के जन्म की सीधी सूचना मिलना नहीं, बल्कि सांख्यिकीय गणना के आधार पर आबादी में अनुमानित बदलाव दिखना है।

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