नेपाल यात्रा पर गए 80 लोग लापता, सभी विदेशी नागरिक; अब तक लोगों के बारे में कोई सूचना नहीं

राज्य सरकार राहत एवं बचाव में जुटी

नेपाल यात्रा पर गए 80 लोग लापता, सभी विदेशी नागरिक; अब तक लोगों के बारे में कोई सूचना नहीं
ईशा योग फाउंडेशन की कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 80 विदेशी नागरिक तिब्बत के ग्यिरोंग में आई बाढ़ के बाद से लापता हैं। फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने बचाव कार्यों में मदद के लिए अधिकारियों से अनुमति मांगी है। तमिलनाडु सरकार ने भी लापता भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।

चेन्नई। ईशा योग फाउंडेशन (आईवाईएफ) के नेपाल तीर्थयात्रा पर गये कुल 80 लोग लापता हैं। ये सभी विदेशी नागरिक हैं और फिलहाल उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। आईवाईएफ के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, “तिब्बत-चीन के ग्यिरोंग में विनाशकारी और दुखद अचानक आयी बाढ़ में कैलाश यात्रा पर गया हमारा एक समूह फंस गया। वापसी के दौरान वे आव्रजन कार्यालय में थे, तभी बाढ़ आ गयी। ऐसा लगता है कि इमारत और शहर का बड़ा हिस्सा बाढ़ में डूब गया है।

हम सभी, स्वयंसेवकों और सहायता दलों सहित, बेहद व्यथित हैं और बचाव कार्य में हरसंभव सहायता करने का प्रयास कर रहे हैं। आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। हम अधिकारियों के साथ संपर्क कर यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि वहां कैसे पहुंचा जा सकता है और जोखिम के बावजूद बचाव कार्य में शामिल होने के लिए तैयार हैं।”

सद्गुरु वासुदवे ने बताया कि यात्रा में शामिल 21 समूहों में से 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं। वहीं, 743 लोग फिलहाल तिब्बत में, 148 लोग नेपाल में, 77 लोग आव्रजन केंद्र पर और तीन स्वयंसेवक नेपाल के तिमुरे में हैं। वासुदेव ने कहा, “ हमारे समूह के लोगों और इस क्षेत्र में प्रभावित सैकड़ों अन्य लोगों के परिवारों तथा प्रियजनों के दर्द को मैं समझता हूं और इस बेहद कठिन समय में हम कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। परिस्थितियों में जो भी बेहतर संभव है, उसे सुनिश्चित करने के लिए मैं स्वयं इस क्षेत्र में हूं।”

इस बीच, सद्गुरु वासुदेव ने अधिकारियों से उन्हें और उनके स्वयंसेवकों को नेपाल में राहत कार्यों में सहायता करने की अनुमति देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ग्यिरोंग में आयी बाढ़ के बाद उनके समूह के 80 लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा, “ हम बेहद पीड़ा के साथ आपको लिख रहे हैं कि ग्यिरोंग में आयी बाढ़ के बाद हमारे समूह के 80 लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हम और उनके परिवार आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि मुझे और कुछ स्वयंसेवकों को ग्यिरोंग जाने की अनुमति दी जाये।”

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वासुदेव ने कहा कि वे बचाव दल के प्रयासों का पूरा सम्मान करते हैं और उन्हें किसी भी तरह बाधित नहीं करेंगे। उनका एकमात्र उद्देश्य प्रभावित लोगों के साथ खड़े रहना और ऐसे किसी संकेत की तलाश में मदद करना है, जिससे उनके परिवारों को कुछ जानकारी मिल सके।उन्होंने कहा, “ हम फिलहाल सागा में हैं और विनम्रतापूर्वक ग्यिरोंग जाने की अनुमति मांगते हैं। आपकी सहायता उन सभी परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी, जिन्हें अपने प्रियजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”

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एक अन्य घटनाक्रम में एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से नेपाल होते हुए कैलास मानसरोवर यात्रा पर गये 57 लोगों में से 20 के सुरक्षित होने की जानकारी मिली है, जबकि शेष 37 पर्यटकों का पता नहीं चल सका है। लापता पर्यटकों में सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश टी. एस. शिवज्ञानम भी शामिल हैं। उनके परिवार के सदस्यों ने उनकी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जतायी है, क्योंकि उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है और उनकी स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट नहीं है कि एक अन्य ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से चेन्नई से कितने लोग यात्रा पर गये थे। रिपोर्टों के अनुसार, 49 लोग चार समूहों में तीर्थयात्रा पर गये हुये थे।

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए विदेश मंत्रालय और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकारी तंत्र को सक्रिय किया है। विजय ने कहा कि नेपाल में अचानक आयी बाढ़ में तमिलनाडु समेत कई भारतीयों के लापता होने की खबर से वह बेहद स्तब्ध और दुखी हैं। उन्होंने कहा, “ मैंने राष्ट्रीय राजधानी स्थित तमिलनाडु हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस आपदा में लापता हुए तमिलनाडु के लोगों को जल्द से जल्द बचाने और प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव कार्रवाई करें।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल में फंसे तमिलों को सहायता की आवश्यकता होने पर वे या तमिलनाडु में उनके परिजन संपर्क कर सकें, इसके लिए आपातकालीन टेलीफोन नंबर जारी किये गये हैं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से तमिलनाडु के लोगों के बारे में जानकारी जुटायी जा रही है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम तेजी से उठाये जा रहे हैं।

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