अतिक्रमण हटाकर 16 नवंबर तक पेश करें पालना रिपोर्ट : हाईकोर्ट
3 सितंबर को बैठक आयोजित की गई थी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रताप नगर के सेक्टर पांच के पास स्थित सरकारी भूमि से नगर निगम और आवासन मंडल को अतिक्रमण हटाकर 16 नवंबर को पालना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश विकास समिति सेक्टर 5 की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में प्रमुख नगरीय विकास सचिव सहित जेडीए, निगम और आवासन मंडल के अधिकारी अदालत में पेश हुए। प्रमुख नगरीय विकास सचिव की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में गत 3 सितंबर को बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें निर्णय लिया गया कि मौके पर मौजूद अतिक्रमणों को आवासन मंडल और नगर निगम मिलकर हटाएगा। अतिक्रमण हटाने के लिए राज्य सरकार की ओर से तीन माह का समय मांगा गया। इस पर अदालत ने निगम आयुक्त और आवासन मंडल से 16 नवंबर को शपथ पत्र पेश कर पालना रिपोर्ट दायर करने को कहा है। बीती सुनवाई पर अदालत के सामने आया था कि कॉलोनी को नगर निगम के क्षेत्राधिकार में सौंपा जा चुका है। वहीं निगम आयुक्त ने अदालत में पेश होकर कहा था कि विवादित कॉलोनी से अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम उत्तरदायी नहीं है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि जब जवाब पेश कर मौके पर अतिक्रमण माना जा चुका है तो फिर उसे हटाने की जिम्मेदारी क्यों नहीं ली जा रही है।
इसके साथ ही, अदालत ने प्रमुख नगरीय विकास सचिव, जेडीए और आवसन मंडल सचिव सहित निगम आयुक्त को 7 सितंबर को पेश होने के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास काबरा ने बताया कि हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल, 2022 को नगर निगम को आदेश दिए थे कि वह अतिक्रमण के संबंध में मिली शिकायतों का परीक्षण करें और अतिक्रमण पाए जाने पर चार माह में नियमानुसार कार्रवाई करे।
24 जुलाई को जेडीए और आवासन मंडल सहित अन्य विभागों के अफसरों ने बैठक कर माना कि मौके पर करीब 145 अतिक्रमण हैं, लेकिन इन्हें रोड, सीवरेज और बिजली-पानी के कनेक्शन जारी हो चुके हैं। इसलिए अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर इन्हें नियमित करने की छूट मांगी जाएगी। इस प्रार्थना को हाईकोर्ट खारिज कर चुकी है। इसके बावजूद भी अभी तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

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