राधाकृष्णन नए उपराष्ट्रपति : सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से हराया, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री ने दी बधाई

दिन में मतदान शाम को परिणाम

राधाकृष्णन नए उपराष्ट्रपति : सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से हराया, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री ने दी बधाई

1998 में कोयंबटूर से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए तथा 1999 में वह पुन: लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। वह झारखंड के राज्यपाल भी रहे हैं। 

नई दिल्ली। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन देश के नए उप राष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने उप राष्ट्रपति के पद के चुनाव के लिए मंगलवार को हुए मतदान में विपक्षी  इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को प्रथम वरीयता मतों की गिनती के आधार पर 152 मतों के बड़े अंतर से हराया। निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने राधाकृष्णन के निर्वाचित होने की घोषणा करते हुए बताया कि इस चुनाव में निर्वाचक मंडल के  कुल 781 सदस्यों में से 767 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया जो कुल मतों का 98.2 प्रतिशत है। मतगणना में वैध पाए गए 752 मतों में से राधाकृष्णन को प्रथम वरीयता के 452 मत और रेड्डी को 300 मत मिले। पंद्रह मत अवैध पाए गए जिनमें डाक से प्राप्त हुआ एक मात्र मत भी शामिल था। 

राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री ने दी बधाई
 राष्ट्रपति दौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राधाकृष्णन को जीत की बधाई दी है। रेड्डी ने भी उन्हें जीत की बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। 

दिन में मतदान शाम को परिणाम
मतदान मंगलवार सुबह दस बजे से पांच बजे तक नए संसद भवन में कराया गया। दोनों उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में मतगणना शाम छह बजे शुरू हुई और करीब डेढ़ घंटे बाद परिणाम घोषित कर दिया गया।

संघ के कार्यकर्ता से देश के दूसरे सवार्च्च संवैधानिक पद पर पहुंचे 
राधाकृष्णन इस समय महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक सामान्य कार्यकर्ता से उठ कर देश के दूसरे सवार्ेच्च संवैधानिक पद पर पहुंचे राधाकृष्णन तमिलनाडु की राजनीति में एक सम्मानित नाम हैं। उनका सार्वजनिक जीवन में पांच दशक से अधिक का लम्बा अनुभव है और दक्षिण में भाजपा का ध्वज लहराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चार मई, 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में जन्मे राधाकृष्णन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक हैं। उन्होंने सार्वजनिक जीवन आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में शुरू किया और 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य बने। उन्हें 1996 में तमिलनाडु में भाजपा का सचिव नियुक्त किया गया। वे 1998 में कोयंबटूर से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए तथा 1999 में वह पुन: लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। वह झारखंड के राज्यपाल भी रहे हैं। 

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