ट्रंप ने की जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की घोषणा : चांसलर से मतभेद के बाद उठाया कदम, 6 महीनों के भीतर होगी वापसी
युद्ध को लेकर उनके पास कोई ठोस रणनीति नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी से 5,000 सैनिक वापस बुलाने की घोषणा की, जिसे छह से 12 महीनों में पूरा किया जाएगा। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से ईरान-इजरायल युद्ध पर मतभेद इसके पीछे बताए जा रहे हैं। पेंटागन ने इसे रणनीतिक फैसला कहा, जबकि डेमोक्रेट्स ने चेताया कि इससे नाटो और अमेरिकी सुरक्षा हित कमजोर होंगे पर असर पड़ेगा भी।
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगी जर्मनी से 5,000 सक्रिय सैनिकों को वापस बुलाने की आधिकारिक घोषणा की है। राष्ट्रपति ने यह कदम जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ ईरान में जारी अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर हुए तीखे मतभेदों और अपनी पिछली धमकियों पर अमल करते हुए उठाया है। अमेरिकी सैनिकों की यह वापसी अगले छह से 12 महीनों के भीतर पूरी की जाएगी। गौरतलब है कि जर्मन चांसलर मर्ज द्वारा अमेरिका-इजरायल युद्ध की आलोचना और पश्चिम एशिया में उथल-पुथल के कारण पैदा हुए वैश्विक तेल संकट पर नाराजगी जताए जाने के बाद ट्रंप ने सैनिकों की कटौती की धमकी दी थी। चांसलर मर्ज ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका को ईरानी नेतृत्व द्वारा अपमानित होना पड़ रहा है और इस युद्ध को लेकर उनके पास कोई ठोस रणनीति नहीं है।
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने एक आधिकारिक बयान में कहा, यह निर्णय यूरोप में विभाग की सैन्य स्थिति की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है। यह फैसला जमीनी परिस्थितियों और रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जर्मनी में वर्तमान में कई महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, जिनमें यूरोपीय और अफ्रीकी कमांड का मुख्यालय, रामस्टीन एयर बेस और लैंडस्टुह्ल स्थित मेडिकल सेंटर शामिल हैं। साथ ही, जर्मनी में अमेरिकी परमाणु मिसाइलें भी तैनात हैं। जर्मनी में कुल तैनात 36,000 अमेरिकी सैनिकों में से लगभग 14 प्रतिशत सैनिकों को वापस बुलाया जा रहा है।इस फैसले पर अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका मानना है कि इस कदम से सीधे तौर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लाभ होगा और इससे अमेरिकी सुरक्षा हित कमजोर होंगे।
सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य जैक रीड ने इस पर चिंता जताते हुए कहा, यह कदम दर्शाता है कि सहयोगियों के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धताएं राष्ट्रपति की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद पर निर्भर करती हैं। राष्ट्रपति को इस लापरवाह कार्रवाई को तुरंत रोकना चाहिए, अन्यथा हमारे गठबंधन और दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसके अपरिवर्तनीय परिणाम हो सकते हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी जर्मनी से लगभग 10,000 सैनिकों को वापस बुलाने की ऐसी ही धमकी दी थी, हालांकि उस समय यह प्रक्रिया धरातल पर नहीं उतर सकी थी।

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