ट्रंप ने दिया ईरान की घेराबंदी जारी रखने का आदेश : ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात पर दबाव बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया, ईरानी बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही को रोकने की अपनाई रणनीति
समुद्री परिवहन अब तक के सबसे निचले स्तर पर
अमेरिका-ईरान वार्ता ठप, ट्रंप ने घेराबंदी कड़ी करने के आदेश दिए। व्हाइट हाउस बैठक में तेल निर्यात और बंदरगाह गतिविधियां रोकने की रणनीति तय हुई। ट्रंप परमाणु संवर्धन पर 20 साल की रोक की मांग पर अड़े हैं। होर्मुज में तनाव से समुद्री परिवहन घटा, गैस कीमतें बढ़ीं—जिसका असर उनकी लोकप्रियता और चुनावी संभावनाओं पर दिख रहा है।
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बात ठप होने के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रशासन को ईरान की घेराबंदी जारी रखने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, व्हाइट हाउस में सोमवार को शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ हुई बैठक में ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात पर दबाव बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया है। इसके तहत ईरानी बंदरगाहों से होने वाली जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह रोकने की रणनीति अपनाई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप वर्तमान में अपनी इस मांग को छोडऩे के पक्ष में नहीं हैं कि ईरान कम से कम 20 वर्षों के लिए अपने परमाणु संवर्धन को स्थगित करने की शपथ ले और उसके बाद भी कड़े प्रतिबंधों को स्वीकार करे। ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु (एजेंसी) को बाद की (बातचीत) के लिए छोडऩे का ईरान का तीन चरणों वाला प्रस्ताव यह साबित करता है कि ईरान नेक नीयत से बातचीत नहीं कर रहा है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध में अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की सफल घेराबंदी के कारण, अमेरिका के पास अब अधिकतम लाभ की स्थिति है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घेराबंदी जारी रहने से संघर्ष लंबा खिंच रहा है, जिससे गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसका असर ट्रंप की लोकप्रियता और मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की संभावनाओं पर भी पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हमलों के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री परिवहन अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

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