रैपर, मेयर, प्रधानमंत्री : बालेंद्र शाह बने नेपाल के नए पीएम, पढें कैसा रहा नेपाल की राजनीति के शीर्ष तक का पूरा सफर ?
नेपाल में 'बालेन' युग: रैपर से प्रधानमंत्री तक का ऐतिहासिक सफर
इंजीनियर और रैपर से राजनेता बने बालेन्द्र शाह ने नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। बेंगलुरु से शिक्षित बालेन ने भ्रष्टाचार विरोधी लहर और 'जेनरेशन-ज़ेड' के समर्थन से पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी। आरएसपी (RSP) के नेतृत्व में मिली भारी जीत के साथ, वह अब नेपाल के निर्णायक नेतृत्व का नया चेहरा हैं।
काठमांडू। नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में श्री बालेन्द्र शाह को प्रधानमंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। बालेंद्र शाह ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 12 बज कर 34 मिनट पर पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस बार शपथ ग्रहण समारोह काफी अलग और विशेष दिखाई दिया। शपथ ग्रहण के दौरान सात शंख फूंके गए। इसी तरह, 108 लोगों (बटुकों) ने स्वस्ति शांति का पाठ किया, और 16 बौद्ध भिक्षुओं ने अष्टमंगल का पाठ किया। 35 वर्षीय बालेन्द्र "बालेन" शाह के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद नेपाल में एक नया राजनीतिक युग शुरू हो गया है। बालेंद्र शाह देश के अब तक के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गये हैं।
रैपर और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से काठमांडू के मेयर तक की उनकी यात्रा नेपाली राजनीति में बदलाव की व्यापक इच्छा को रेखांकित करती है।
शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति कार्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव, मुख्य न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह राउत और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सहित शीर्ष गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इससे पहले गुरुवार को शाह ने प्रतिनिधि सभा के सदस्य के रूप में भी गोपनीयता की शपथ ली थी। वर्ष 2022 में स्ट्रक्चरल इंजीनियर से अंडरग्राउंड रैपर बने बालेंद्र शाह ने काठमांडू के मेयर पद की दौड़ में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में "चलने वाली छड़ी" के प्रतीक पर चुनाव लड़कर सुर्खियां बटोरी थीं। उन्होंने 61,767 वोट प्राप्त कर नेपाली कांग्रेस की सुश्री सिरजना सिंह और पूर्व मेयर केशव स्थापित (सीपीएन-यूएमएल) सहित कई अनुभवी राजनेताओं को हराया था।
काठमांडू के मेयर से मात्र चार वर्षों में राष्ट्रीय नेता बनने तक की शाह की उड़ान नेपाली राजनीति में नाटकीय बदलाव को दर्शाती है। अपने काले आयताकार चश्मे और भ्रष्टाचार व सामाजिक अन्याय के खिलाफ अपनी रैप गीतों के लिए प्रसिद्ध शाह ने बदलाव चाहने वाले मतदाताओं की भावना को छू लिया है। इस महीने की शुरुआत में हुए चुनावों के बाद गुरुवार को नेपाल की नई संसद का पहला सत्र बुलाया गया, जिसमें नवनिर्वाचित सदस्यों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। सितंबर 2025 में जेन-जेड विरोध प्रदर्शनों के बाद पिछली संसद भंग कर दी गई थी। पांच मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में श्री शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 182 सीटें हासिल कीं, जबकि नेपाली कांग्रेस को 38 और सीपीएन-यूएमएल को 25 सीटें मिलीं। समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत आरएसपी को 57 सीटें मिलीं, जबकि शेष 53 सीटें अन्य दलों ने भरीं।
फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के तहत आरएसपी ने 125 सीटें जीतीं, जिससे शाह की निर्णायक जीत सुनिश्चित हुई। कार्यभार संभालने से पहले श्री शाह ने नेपाल के भविष्य पर अपनी दृष्टि को प्रतिबिंबित करने वाला एक गाना जारी किया। यह ट्रैक कुछ घंटों में दो मिलियन से अधिक बार देखा गया। यह गाना एकता और आशावाद की अपील करता है, जो बदलाव के लिए उत्सुक जनता के साथ गूंजता है। बालेंद्र शाह का जन्म 1990 में काठमांडू के नरदेवी में हुआ था और वे अपने माता-पिता के सबसे छोटे पुत्र हैं। उनके पिता आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं और मां घर पर परिवार की देखभाल करती रहीं। श्री शाह विवाहित हैं और अपनी पत्नी तथा एक बेटी के साथ रहते हैं।
रैपर से राजनेता बने बालेन्द्र शाह ने चार साल में नेपाल की राजनीति के शीर्ष तक का सफर पूरा कर लिया है। राजनीति में शून्य से अपनी शुरूआत करने वाले श्री शाह शुक्रवार को शपथ लेने के बाद नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गये। काठमांडू में 27 अप्रैल 1990 को जन्मे श्री शाह इससे पहले 2022 से 2026 तक काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
बालेन्द्र शाह का जन्म एक नेवार बौद्ध परिवार में हुआ। उनके पिता आयुर्वेद के चिकित्सक थे। उन्होंने काठमांडू के हिमालयन व्हाइटहाउस इंटरनेशनल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक हासिल किया। इसके बाद भारत आकर 2018 में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में परास्नातक की डिग्री प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले शाह नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप (नेफहॉप) संगीत जगत में सक्रिय थे। उनका गीत 'सड़क बालक' 2012 में रिलीज हुआ और 2013 में 'रॉ बार्ज़' रैप-बैटल मंच के माध्यम से उन्हें व्यापक पहचान मिली। उनके गीतों में भ्रष्टाचार, असमानता और युवाओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
लोकप्रिय होने के बाद श्री शाह ने राजनीति का रुख किया और दिसंबर 2021 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने की घोषणा की। श्री शाह के गीतों के मुद्दे उनकी राजनीति में भी हूबहू आ गये। उन्होंने अपने चुनाव अभियान में पारंपरिक प्रचार के तरीकों के बजाय सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग करते हुए भ्रष्टाचार विरोध, पारदर्शिता, शहरी सुधार, कचरा प्रबंधन और यातायात व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जोर दिया।
इस नये रास्ते के जरिये वह युवाओं से बेहतर तरीके से जुड़ सके और 2022 में काठमांडू के पहले निर्दलीय मेयर निर्वाचित हुए। मेयर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कुछ निर्णयों को लेकर आलोचनाएं भी सामने आईं। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने अतिक्रमण हटाने और सड़क विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। इसके अलावा 2023 में एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी विवाद हुआ।
छिटपुट आलोचनाओं के बावजूद श्री शाह एक लोकप्रिय नेता बने रहे। सितंबर 2025 में नेपाल में जेनरेशन-ज़ेड नेतृत्व वाले व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन सरकार का पतन हो गया और अंतरिम सरकार का गठन किया गया। इस राजनीतिक बदलाव के बीच श्री शाह एक प्रमुख राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरे। बालेंद्र शाह युवाओं के इस विरोध का चेहरा माने गये। उन्होंने इन प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील भी की।
बालेंद्र शाह दिसंबर 2025 में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हुए और जनवरी 2026 में मेयर पद से इस्तीफा देकर संसदीय चुनाव मैदान में उतरे। मार्च 2026 के आम चुनाव में उनकी पार्टी को बहुमत प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया गया। उनकी आक्रामक सार्वजनिक शैली और पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति तीखे रुख को लेकर आलोचना भी हुई है, हालांकि विश्लेषकों के अनुसार बड़ी युवा आबादी के बीच उन्हें एक वैकल्पिक और निर्णायक नेतृत्व के रूप में देखा जा रहा है।

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