आर्थिक संकट में तेजी से बिक रही गरीबों की जमीनें
सरकारी योजनाओं का सहारा लें
जागरूकता की कमी से बढ़ रहा भूमिहीनता का खतरा, स्थाई रूप से पटवारी की नियुक्ति की मांग
अरनेठा। अरनेठा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की जमीनों के तेजी से बिकने के मामले सामने आ रहे हैं। आर्थिक तंगी, बढ़ते कर्ज, जागरूकता की कमी और बिचौलियों के झांसे में आकर कई लोग अपनी पैतृक जमीन कम दामों में बेचने को मजबूर हो रहे हैं। इससे उनका भविष्य असुरक्षित होने के साथ सामाजिक और आर्थिक असमानता भी बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में परिवार भूमिहीन हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि जमीन बेचने से पहले दस्तावेज, रजिस्ट्री और सरकारी नियमों की पूरी जानकारी अवश्य लें। बिचौलियों से सावधानी बरतते हुए बाजार दर की जानकारी लेकर ही सौदा तय करें।
ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि आर्थिक संकट की स्थिति में जमीन बेचने के बजाय सरकारी योजनाओं, ऋण और अनुदान का सहारा लिया जाए तथा किसी भी बड़े निर्णय से पहले अनुभवी व्यक्तियों, वकीलों या राजस्व अधिकारियों से परामर्श किया जाए।
साथ ही ग्रामीणों ने मांग की कि पिछले दो वर्षों से अतिरिक्त प्रभार पर चल रहे अरनेठा पटवार मंडल में स्थाई रूप से पटवारी चंद्रशेखर नागर की नियुक्ति की जाए, ताकि व्यवस्थाएं सुचारू हो सकें।
इनका कहना है
किसानों पर कर्ज का दबाव लगातार बढ रहा है। पिछले एक वर्ष से करीब 60-70 किसानों की जमीनें बिक चुके है।
-चन्द्रशेखर नागर, पटवारी, पटवार मंडल, अरनेठा।
इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है, और प्रयास किए जाएंगे कि किसानों को जमींने कम से कम बिके।
-रामकिशोर मीणा, अतिरिक्त जिला कलक्टर, बूंदी।

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