संजय राउत ने शिंदे-भाजपा गठबंधन पर साधा निशाना : प्रशासन में भ्रष्टाचार फैलाने का लगाया आरोप, कहा- मंदिर में हेराफेरी जैसे सनसनीखेज दावों ने खोले टकराव के कई मोर्चे
बालासाहेब की तस्वीर न लगाने का निर्देश
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट पर दिल्ली के दबाव में झुकने, पार्टी के संस्थापकों की तस्वीरें सार्वजनिक मंचों से हटाने और प्रशासन में भ्रष्टाचार फैलाने का आरोप लगाया है। राउत की तीखी टिप्पणियों, जिसमें सत्ताधारी खेमे की विचारधारा की वैधता पर सवाल उठाने से लेकर वरिष्ठ नेताओं की राष्ट्रीय स्तर पर संभावित भूमिका और सिद्धिविनायक मंदिर में हेराफेरी जैसे सनसनीखेज दावों ने टकराव के कई मोर्चे खोल दिए हैं। राउत ने सत्ताधारी नेतृत्व पर आक्रोश व्यक्त करते हुए दावा किया, मालिक ने बालासाहेब की तस्वीर न लगाने का निर्देश दिया है। उन्होंने इस गुट को केंद्रीय आलाकमान के सामने कांपने वाले कायर करार दिया।
राउत ने एक अहम राजनीतिक टिप्पणी में दावा किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में कामकाज की खामियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कदम उठाने पर मजबूर किया, जिससे बड़े प्रशासनिक बदलावों की अटकलें तेज हो गई हैं। राउत ने इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आंतरिक आलाकमान संस्कृति पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी दिल्ली से पूरा नियंत्रण बनाए रखने के लिए अलग-अलग राज्यों में कम चर्चित और कम काबिल नेताओं को बिठाकर लोकप्रिय क्षेत्रीय नेतृत्व को व्यवस्थित रूप से किनारे कर देती है।
सांसद राउत ने प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी भ्रष्टाचार की गंभीर चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर का प्रशासनिक नियंत्रण और चाबियां एकनाथ शिंदे के वफादारों के हाथों में आते ही वित्तीय अनियमितताएं और व्यवस्थित तरीके से धन की हेराफेरी शुरू हो गई। राउत ने उन आलोचकों पर पलटवार करते हुए सत्ताधारी खेमे को ही घेरे में ले लिया, जिन्होंने पहले उद्धव ठाकरे को फेसबुक सीएम कहा था। उन्होंने कहा कि जो नेता कभी डिजिटल पहुंच का मजाक उड़ाते थे, वे अब खुद ही सोशल मीडिया अभियान चलाने में लगे हैं।

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