सुप्रीम कोर्ट का फैसला तृणमूल कांग्रेस के इरादों पर सवालिया निशान : अदालत का चुनावी प्रक्रिया में दखल से इनकार, भाजपा ने कहा- फैसला संवैधानिक रूप से सही
याचिका पूरी तरह से खारिज कर दी
मतगणना पर्यवेक्षक नियुक्ति पर टीएमसी की याचिका खारिज की, जिसे भाजपा ने “संवैधानिक रूप से सही” बताया। प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, फैसला टीएमसी के इरादों पर सवाल उठाता है। उन्होंने ममता बनर्जी पर अविश्वास का आरोप लगाया और इंडिया गठबंधन को बार-बार अदालत जाने को राजनीतिक हताशा बताया।
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उच्चतम न्यायालय द्वारा शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की मतगणना पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से संबंधित याचिका खारिज किये जाने का स्वागत करते हुए इसे राजनीतिक और नैतिक नजरिए से पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी के इरादों पर गंभीर सवालिया निशान बताया है। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वोटों की गिनती के दौरान पर्यवेक्षक या सहायक पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्र सरकार या केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों की तैनाती के चुनाव आयोग के निर्णय को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में तृणमूल कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने आज तृणमूल की याचिका को खारिज कर दिया और चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह के दखल से साफ इनकार कर दिया। त्रिवेदी ने कहा, उल्लेखनीय बात यह है कि राम लला के खिलाफ बाबरी मस्जिद के खिलाफ केस लड़ने वाले तथा तमाम आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति रखने वाले और तृणमूल कांग्रेस के प्रति राजनीतिक रूप से अभिभूत रहने वाले कपिल सिब्बल की याचिका आज पूरी तरह से खारिज कर दी गयी।
उन्होंने कहा कि आज का उच्चतम न्यायालय का फैसला संवैधानिक रूप से सही है। राजनीतिक और नैतिक न•ारिए से यह तृणमूल कांग्रेस के इरादों पर एक गहरा और गंभीर सवालिया निशान लगाता है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, उन्हें केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर भरोसा नहीं है, लेकिन राज्य सरकार के कर्मचारियों पर भरोसा है। इसलिए, मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहना चाहता हूं कि आज भरोसे का सवाल खुद आप पर है। जब आई-पैक पर छापा पड़ा, तो यह पहली बार था, जब कोई मुख्यमंत्री खुद मौके पर पहुंचीं। इसका मतलब है कि उन्हें अपनी ही पुलिस और अपनी ही राज्य सरकारी एजेंसियों पर भरोसा नहीं था, इसीलिए वह खुद वहां गयीं।
इस दौरान उन्होंने इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, मेरा इंडिया गठबंधन से एक सवाल है और देश की जनता को इस मुद्दे पर जरूर ध्यान देना चाहिए। अगर चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में बिना किसी ङ्क्षहसा या हत्या के हो रहे हैं और फिर भी उन पर आपत्तियां उठायी जा रही हैं, तो इससे कई अहम सवाल खड़े होते हैं। बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना न केवल आपकी राजनीतिक हताशा को दर्शाता है, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था में आपके भरोसे पर भी सवाल खड़े करता है, और यह भी संकेत देता है कि आप इसका दुरुपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं।

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