सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को सख्त निर्देश : फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार, हटाएं अतिक्रमण
पैदल यात्रियों के लिए तय रास्तों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं हो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पैदल चलने वालों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार को अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि जहां भी सड़क हो, वहां पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित, स्पष्ट और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ या निर्धारित मार्ग होना अनिवार्य है। साथ ही पैदल मार्ग को वाहनों की लेन से अलग रखने के लिए उचित बैरिकेडिंग या सीमांकन किया जाना चाहिए।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि पैदल यात्रियों के लिए तय रास्तों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके लिए बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं है, बल्कि साधारण उपायों से भी पैदल मार्ग सुरक्षित बनाए जा सकते हैं। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए केंद्र को दो सप्ताह का समय दिया है।
दरअसल, यह मामला एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें स्कूल जाते समय एक 5 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा था कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। अदालत के अनुसार यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) और अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है तथा प्रशासन की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को सुरक्षित पैदल मार्ग उपलब्ध कराए जाएं।

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