राम मंदिर में चंदा चोरी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच : वेणुगोपाल ने मोदी को लिखा पत्र, कहा- दान चोरी और गबन के खुलासों से भारतीयों की आस्था पर आघात
मंदिर के प्रशासन और उसकी कार्यप्रणाली की जवाबदेही पूरी तरह केंद्र सरकार की
नई दिल्ली। कांग्रेस ने केन्द्र सरकार से अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि की चोरी और गबन के मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने, जांच का दायरा राम भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तथा उससे जुड़े सभी जिम्मेदार व्यक्तियों तक बढ़ाने और मंदिर ट्रस्ट में व्यापक संस्थागत सुधार लागू कर दान व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को मोदी को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि अयोध्या राम मंदिर में दान राशि की चोरी और गबन के खुलासों से करोड़ों भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है और इससे उनमें आक्रोश और पीड़ा है। करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के नाम पर अपनी मेहनत की कमाई मंदिर को दान की, लेकिन उनकी आस्था और विश्वास के साथ खिलवाड़ किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान राम, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, उनके नाम का पहले राजनीतिक लाभ के लिए और बाद में आर्थिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया गया।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद सार्वजनिक भूमि पर भारत सरकार द्वारा गठित सार्वजनिक ट्रस्ट के माध्यम से हुआ है। इसलिए मंदिर के प्रशासन और उसकी कार्यप्रणाली की जवाबदेही पूरी तरह केंद्र सरकार की है। उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी को लेकर विभिन्न स्तरों से लगातार चेतावनियां दी जाती रहीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया और जिम्मेदार लोगों ने आंखें मूंदे रखीं, जिससे करोड़ों रुपये की दान राशि की चोरी होती रही।
वेणुगोपाल ने कहा कि प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह चोरी का मामला कुछ कर्मचारियों तक ही सीमित मामला नहीं है, बल्कि यह पूरा मामला एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है। नकदी और आभूषणों की हेराफेरी, सात से आठ महीने की सीसीटीवी फुटेज का गायब होना, पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी की शिकायतों की अनदेखी करना तथा भारतीय स्टेट बैंक की ओर से दान की गणना में अनियमितताओं को लेकर जतायी गयी चिंताओं पर भी ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई अब तक निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि पूरे मामले के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ लोगों तक जांच नहीं पहुंची है। इससे यह आशंका पैदा होती है कि वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करायी जाये, जांच का दायरा राम भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उससे जुड़े सभी जिम्मेदार व्यक्तियों तक बढ़ाया जाये, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये तथा मंदिर ट्रस्ट में व्यापक संस्थागत सुधार लागू कर दान संग्रह, लेखा-जोखा और प्रशासनिक व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाये, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल हो सके।

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