एक लड़की का अपनी अस्मत लूटने के खिलाफ  जंग का ऐलान है ‘इन कार’

फिल्म समीक्षाः इन कार

एक लड़की का अपनी अस्मत लूटने के खिलाफ  जंग का ऐलान है ‘इन कार’
ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जो जीना चाहती है और उसके लिए लड़ना भी। बेशक उसे डर लगता है, हार मान कुछ पलों के लिए उसकी हिम्मत भी टूटती है। गिवअप भी करती है, लेकिन अंदर से हर लड़की मजबूत होती है।

जयपुर। बेबस मजबूर हालत की मारी एक बेचारी लड़की की कहानी नहीं है ये इनकार की कोई भी आयेगा उठा केले जाएगा और अपनी हवस का शिकार बना कर कहीं सड़क पर फेंक जाएगा। ये कहानी है एक ऐसी लड़की की जो जीना चाहती है और उसके लिए लड़ना भी। बेशक उसे डर लगता है, हार मान कुछ पलों के लिए उसकी हिम्मत भी टूटती है। गिवअप भी करती है, लेकिन अंदर से हर लड़की मजबूत होती है। उसे जब इसका एहसास होता है तो वो जो ठान ले उसके आगे कोई नहीं टिक सकता। वो अकेले ही काफी है। यही कहानी है ‘इन कार’ की जो कुछ वहशी दरिंदो की वहशत का जवाब अपने हौसले और हिम्मत से देती है। कहानी है जेल से जमानत पर रिहा रिची (मनीष झंझोलिया) की, जो अपने बड़े भाई यश (संदीप गोयत) के साथ देवी मां के मंदिर से दर्शन करके निकलता है। उनके साथ उसका मामा (सुनील सोनी) भी है। अपनी गाड़ी खराब होने पर बंदूक की नोंक पर मामा एक गाड़ी को रोकता है। रास्ते में उनकी सोच और जिंदगी की परते खुलती हैं। रिची ने अपनी बड़ी बहन के ब्वायफ्रेंड को चाकू घोंपा होता है। लड़का अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर है। मामा रिची को किसी पुरानी फैक्ट्री में ठहराने जा रहा है। इस दौरान दिनदहाड़े वे बस स्टाप से साक्षी (रितिका सिंह) का अपहरण कर लेते हैं। साक्षी छोड़ने के लिए मिन्नतें करती है पर वे लोग पसीजते नहीं। क्या होगा साक्षी का, क्या साक्षी उनके चंगुल से निकल पाएगी। यही है फिल्म इन कार। कहानी के नाम पर बस एक प्लॉट है जो एक हादसे की वो रोंगटे खड़े करने वाली दास्तान है जिसे हर सेकंड दहशत के साए में थ्रिल के साथ परोसा गया है। निर्देशक हर्षवर्धन की ये फिल्म दिल को झंझोड़ देती है। वास्तविकता को सामने लाकर सवाल पूछती है । रितिका सिंह का दमदार किरदार है। संदीप गोयल और मनीष झिझोटिया ने अपने किरदारों में जान फूंकी है। पार्श्व संगीत अच्छा है। एडिटिंग सेकंड हाफ  में ग्रिप लाती है। सिनेमेटोग्राफी आपको हादसे के करीब लाती है और उन पलों से जोड़ती है जो किसी की जिंदगी बदल सकते हैं। ओवरआल फिल्म देखकर भूलने वाला एंटरटेनमेंट नही है बल्कि समाज का आइना है जिसमे इंसान की सूरत घिनौनी लगती है।

- दानिश राही  

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

दिल्ली में खराब मौसम, श्रीनगर-दिल्ली फ्लाइट जयपुर डायवर्ट दिल्ली में खराब मौसम, श्रीनगर-दिल्ली फ्लाइट जयपुर डायवर्ट
दिल्ली एयरपोर्ट पर खराब मौसम के चलते श्रीनगर से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट को जयपुर डायवर्ट किया।...
वोटबैंक और तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली पार्टियां हाशिए पर चली गईं : गजेन्द्र सिंह शेखावत
राजस्थान नगर निगम चुनाव 2026 LIVE: जयपुर में मतदान प्रक्रिया समाप्त, प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद
राजस्थान नगर निगम चुनाव 2026: नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण के मतदान समाप्त, प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद
मुस्लिम बहुल इलाकों में मतदान को लेकर जबरदस्त उत्साह, शाम 5 बजे तक लगी रहीं कतारें
राजस्थान नगर निगम चुनाव 2026: नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण में पूर्वाह्न 3 बजे तक 57 प्रतिशत से अधिक मतदान
राजस्थान नगर निगम चुनाव 2026: अटरू, छबड़ा और मांगरोल में 68.18 प्रतिशत मतदान, बुजुर्गों और दिव्यांगों ने भी बढ़-चढ़कर निभाई लोकतांत्रिक जिम्मेदारी