अवकाश के दिन हाईकोर्ट में सुनवाई, श्रीविजयनगर चुनाव पर अहम आदेश
मतदान का समय बढ़ाकर शाम 5 बजे किया
जोधपुर। बाबा रामदेव जयंती के अवकाश के बावजूद सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनाव से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई। मामलों की तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर कोर्ट खुला। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ के साथ जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ ने अलग-अलग मामलों की सुनवाई की। श्रीविजयनगर नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव से जुड़े मामलों में कोर्ट ने अधिकारियों से तथ्यात्मक स्थिति ली और निर्देश जारी किए। इसी बीच मतदान का समय दोपहर 2 बजे से बढ़ाकर शाम 5 बजे कर दिया गया।श्रीविजयनगर निवासी शशि पत्नी विजय कुमार टिन्ना की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया कि 21 सितंबर की सुबह विजय कुमार अन्य लोगों के साथ मतदान के लिए जा रहे थे। बजूवाला के पास अज्ञात लोगों ने तीन मतदाताओं पर फायरिंग की और उन्हें अपने साथ ले गए। याचिका में कहा गया कि विजय कुमार का मोबाइल बंद था और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को श्रीगंगानगर एसपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दोपहर 2 बजे कोर्ट दोबारा बैठा :
एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए। खंडपीठ ने उन्हें विजय कुमार को शाम 4 बजे तक तलाश करने और उन्हें नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में मतदान का अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
चुनाव परिणाम याचिका के फैसले पर निर्भर :
कोर्ट ने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि श्रीविजयनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव का परिणाम रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि तीनों मतदाता उनके राजनीतिक दल से जुड़े हैं। उनके मतदान नहीं करने की स्थिति में तीन मतों का नुकसान हो सकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय की।
तत्काल राहत नहीं :
संतोष बंसल व अन्य की आपराधिक विविध याचिका पर भी अवकाश के दिन सुनवाई हुई। याचिकाकतार्ओं ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी वंदना जैन को 21 सितंबर के चुनाव में मतदान से रोकने के लिए धमकियां दी जा रही हैं और गिरफ्तारी की आशंका है। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि वंदना जैन का नाम एफआईआर में नहीं है और फिलहाल उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। रिकॉर्ड देखने के बाद कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।

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