पुलकित सम्राट ने फिल्म ‘राहु केतु’ में काम करने की बताई वजह, जानें अभिनेता ने क्या कहा
अभिनेता ने अपनी माँ के अटूट विश्वास और समर्थन पर भी दिल से बात की
अभिनेता पुलकित सम्राट ने फिल्म ‘राहु केतु’ साइन करने के पीछे भावनात्मक वजह बताई। उन्होंने कहा कि बचपन की फैंटेसी फिल्मों से जुड़ाव और इस जॉनर में काम करने का सपना उन्हें स्क्रिप्ट से जोड़ गया। पुलकित ने अपने करियर में मां के अटूट विश्वास और समर्थन को भी अहम बताया, जिसने उन्हें अभिनेता बनने के सफर में मजबूती दी।
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता पुलकित सम्राट ने फिल्म ‘राहु केतु’ में काम करने की वजह बताई है। पुलकित सम्राट ने हाल ही में अपनी नई फिल्म ‘राहु केतु’ को हाँ कहने के पीछे की असली वजहों और अपने सफर में माँ की अहम भूमिका को लेकर खुलकर बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने यह प्रोजेक्ट सिर्फ वरुण और विपुल के साथ जुड़ाव के कारण साइन किया, तो पुलकित का जवाब कहीं ज्यादा निजी और भावनात्मक था। एक पंक्ति में कहें तो यह उनके बचपन के सपनों, फैंटेसी फिल्मों के प्रति प्यार और परिवार के सहारे से जुड़ा हुआ था।
पुलकित सम्राट के लिए ‘राहु केतु’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि इमोशन है। उनकी माने तो जैसे ही उन्होंने इसकी स्क्रिप्ट सुनी, फैंटेसी वाला एंगल उन्हें तुरंत भा गया। बचपन में देखी फैंटेसी फिल्मों को याद करते हुए उन्होंने कहा- ‘अजूबा’ और ‘छोटा चेतन’ जैसी फिल्मों ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी है और जिंदगी में कुछ पल ऐसे होते हैं, जिन्हें लगता है जैसे आप पहले ही अपने बचपन में जी चुके हैं। उन फिल्मों के जरिए फैंटेसी के प्रति जगे इसी लगाव ने बहुत कम उम्र में मेरे अंदर फैंटेसी सिनेमा के प्रति खास आकर्षण पैदा कर दिया था।
गौरतलब है कि फैंटेसी फिल्म का हिस्सा बनना पुलकित का लंबे समय से संजोया हुआ सपना रहा है। जब यह स्क्रिप्ट उनके पास आई, तो उन्हें लगा कि यही वह मौका है, जिसका उन्हें इंतजार था। फिल्ममेकर विपुल विग और को-स्टार वरुण के साथ एक बार फिर काम करने का अवसर पाकर उनका भरोसा और मजबूत हो गया।
पुलकित ने अपनी माँ के अटूट विश्वास और समर्थन पर भी दिल से बात की। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए, उन्होंने कहा- जब पूरा परिवार मेरे मुंबई जाने के फैसले के खिलाफ था, तब मेरी माँ ही थीं जो मजबूती से मेरे साथ खड़ी रहीं। उन्होंने न सिर्फ मेरे सपनों का साथ दिया, बल्कि परिवार के बाकी लोगों के खिलाफ जाकर यह सुनिश्चित किया कि मैं अपने जुनून को पूरा कर सकूँ। उन्हें पूरा विश्वास था कि मैं मुंबई जाकर हीरो बनूँगा। पुलकित ने इस नाजुक दौर में माँ के साहस और भरोसे को खुले दिल से स्वीकारा।
पुलकित सम्राट की कहानी सिर्फ सही फिल्म चुनने की नहीं है, बल्कि अपने बचपन के सपनों से जुड़े रहने और बिना शर्त मिलने वाले समर्थन की अहमियत को समझने की भी है। फैंटेसी सिनेमा के प्रति उनका प्यार और माँ का अडिग विश्वास उनकी यात्रा के मार्गदर्शक रहे हैं। आज, एक अभिनेता के रूप में लगातार आगे बढ़ते हुए, पुलकित का सफर इस बात की याद दिलाता है कि जुनून और परिवार के सहारे से सपने सच में हकीकत बन सकते हैं।

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