खराब मौसम सबसे बड़ा खलनायक
हादसे का मुख्य कारण
घना कोहरा, स्मॉग, भारी बारिश, तूफानी हवाएं और भारी बर्फबारी के दौरान विज़िबिलिटी कम हो जाती है, जो जानलेवा साबित होती है।
घना कोहरा, स्मॉग, भारी बारिश, तूफानी हवाएं और भारी बर्फबारी के दौरान विज़िबिलिटी कम हो जाती है, जो जानलेवा साबित होती है। खराब मौसम का सबसे बड़ा असर विमान के टेकऑफ और लैंडिंग के समय पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी फ्लाइट के कुल उड़ान समय का केवल पांच से छह प्रतिशत हिस्सा ही टेक ऑफ और लैंडिंग का होता है। इसके बावजूद होने वाली कुल हवाई दुर्घटनाओं में से लगभग 70 प्रतिशत दुर्घटनाएं इसी दौरान होती हैं। हवा की दिशा या गति का अचानक बदल जाना विमान का संतुलन बिगाड़ देता है, जिसे विंड शियर कहा जाता है। यदि टेक ऑफ या लैंडिंग के समय विंड शियर हो जाए, तो संतुलन और भी ज्यादा बिगड़ जाता है।
मौसम में अचानक बदलाव :
भले ही विमानों में ऑटो पायलट मोड, एडवांस वेदर रडार और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम मौजूद हों, फिर भी मौसम में होने वाला अचानक बदलाव बड़ा असर डाल देता है। उस समय मानव निर्णय क्षमता की सीमाएं एयर ट्रैफिक का दबाव और कई अन्य कारण मिलकर दुर्घटना का कारण बनते हैं। दुनिया भर में सामान्यतः हवाई यात्रा को सबसे आसान, सुरक्षित और तेज परिवहन माध्यम माना जाता है। लोग इसका सबसे अधिक उपयोग करने लगे हैं। गति और आराम की सुविधाओं के साथ साथ इसमें सबसे बड़ा जोखिम भी जुड़ा होता है और वह है जान का जोखिम। हवाई यात्रा के दौरान यदि विमान दुर्घटनाग्रस्त होता है तो अधिकांश मामलों में जानमाल की भारी क्षति होती है।
हादसे का मुख्य कारण :
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और राज्य की राजनीति के दिग्गज नेता अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस खबर से पूरा देश स्तब्ध रह गया। वह मुंबई से बारामती जा रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इस हादसे का मुख्य कारण मौसम में आया अचानक बदलाव था। घने कोहरे और मौसम के बिगड़ने के कारण उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल एनसीपी नेता का ही नहीं, बल्कि भारत और दुनिया भर में हुए अनेक विमान और हेलिकॉप्टर हादसों के पीछे सबसे बड़ा कारण मौसम में अचानक बदलाव ही रहा है। खासकर टेकआफ और लैंडिंग के दौरान मौसम में होने वाला अचानक परिवर्तन सबसे घातक साबित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार :
हैरानी की बात यह है कि आज एविएशन सेक्टर में अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है, पायलटों को एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है और विमानों में भी उन्नत संसाधन लगे होते हैं, फिर भी मौसम के अचानक बदलने से विमान बच नहीं पाते और गंभीर हादसे हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार खराब मौसम सीधे तौर पर विमान की विज़न क्षमता, संतुलन, इंजन की क्षमता और पायलट की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। खराब मौसम में की गई एक छोटी सी गलती भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। कुल उड़ान समय का केवल पांच छह प्रतिशत हिस्सा टेकआफ और लैंडिंग का होता है, फिर भी 70 प्रतिशत हवाई दुर्घटनाएं इसी दौरान होती हैं। यह बात केवल विमानों पर ही नहीं, हेलिकॉप्टरों पर भी लागू होती है।
रनवे साफ दिखाई नहीं देता :
ऐसे समय में रनवे साफ दिखाई नहीं देता और पायलट को तकनीक और जीपीएस पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि उसी दौरान कोई तकनीकी समस्या आ जाए, तो दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि तेज और तूफानी हवा, यानी विंड शियर, विमान दुर्घटनाओं में बड़ी भूमिका निभाती है। हवा की दिशा या गति का अचानक बदल जाना विमान का संतुलन बिगाड़ देता है। मानसून के मौसम और पहाड़ी इलाकों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। हेलिकॉप्टर क्रैश की खबरें समय समय पर आती रहती हैं। कम ऊंचाई पर उड़ान, पहाड़ों का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव, दुर्गम क्षेत्र, अचानक बदलता मौसम, विंड शियर और रडार कवरेज की सीमाएं, ये सभी कारण हादसों में योगदान देते हैं।
अचानक कोहरा छा जाना :
केदारनाथ, बद्रीनाथ, अरुणाचल और सियाचिन जैसे क्षेत्रों में अचानक कोहरा छा जाना, भारी बारिश, बर्फबारी या बादलों से टकराने जैसी घटनाओं के कारण कई हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
भारत में 2020 में कोझिकोड में एक बड़ी विमान दुर्घटना हुई थी। एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान रनवे से फिसलकर खाई में गिर गया था। भारी बारिश के कारण रनवे बहुत फिसलन भरा हो गया था। टेबल टॉप एयरपोर्ट पर हुई यह दुर्घटना खराब मौसम के कारण हुई बड़ी घटनाओं में से एक थी। भारतीय सेना और वायुसेना के कई हेलिकॉप्टर भी मौसम में अचानक बदलाव के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।
सबसे बड़ा कारण बनता है :
दुनिया में भी कई विमान हादसे ऐसे हुए हैं, जिनमें खराब मौसम मुख्य कारण रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक बदलता मौसम, मानवीय सीमाएं, एयर ट्रैफिक का दबाव और परिस्थितिजन्य फैसले मिलकर दुर्घटनाओं को जन्म देते हैं, जिन्हें पूरी तरह रोक पाना अक्सर असंभव हो जाता है। भारत में कैट.3 लेवल की इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम मौजूद है, जो जीरो विजिबिलिटी से लेकर 200 मीटर तक की दृश्यता में भी विमान को सुरक्षित लैंड कराने में मदद करती है। पायलटों को सिम्युलेटर ट्रेनिंग दी जाती है और एआई आधारित वेदर प्रेडिक्शन तथा रियल टाइम टर्बुलेंस मैपिंग का भी उपयोग किया जाता है। फिर भी अधिकतर मामलों में खराब मौसम ही सबसे बड़ा कारण बनता है।
-स्नेहा सिंह
यह लेखक के अपने विचार हैं।

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