नेपाल में ‘Gen Z शासन’ की शुरुआत : प्रधानमंत्री बालेन शाह के फैसलों से सिस्टम में बड़ा बदलाव, 30 दिनों में ऐतिहासिक बदलाव

नेपाल में बालेन शाह का 'सिस्टम सुधार' मिशन

नेपाल में ‘Gen Z शासन’ की शुरुआत : प्रधानमंत्री बालेन शाह के फैसलों से सिस्टम में बड़ा बदलाव, 30 दिनों में ऐतिहासिक बदलाव

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नेपाल में "Gen Z शासन" की शुरुआत करते हुए भ्रष्टाचार और VIP संस्कृति पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। छात्र राजनीति पर प्रतिबंध, डिजिटल पारदर्शिता और सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक सक्रियता पर रोक जैसे कड़े फैसलों से प्रशासन को आधुनिक बनाया जा रहा है। उनका 100-सूत्रीय एजेंडा नेपाल के भविष्य को नई दिशा दे रहा है।

काठमांडू। नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। 27 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बालेन शाह ने अपने पहले 30 दिनों में ऐसे कई फैसले लिए हैं, जिन्हेंसिस्टम बदलावकी दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। उनकी सरकार का उद्देश्य पारंपरिक राजनीतिक ढांचे को तोड़कर एक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक प्रशासन स्थापित करना है।

गवर्नेंस में पारदर्शिता: 100-सूत्रीय एजेंडा की शुरुआत

प्रधानमंत्री शाह की पहली कैबिनेट बैठक में 100-सूत्रीय शासन सुधार एजेंडा को मंजूरी दी गई। इस एजेंडा का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज को डिजिटल और पारदर्शी बनाना है। सरकार ने एक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जहां नागरिक सरकारी परियोजनाओं के बजट और प्रगति को रियल-टाइम में देख सकते हैं।

प्रशासनिक ढांचे में बदलाव: मंत्रालयों का आकार घटाने की योजना

सरकार ने प्रशासन को अधिक कुशल बनाने के लिए संघीय मंत्रालयों की संख्या 25 से कम करने और गैर-जरूरी बोर्ड समितियों को समाप्त करने की योजना बनाई है। इस कदम से सरकारी खर्च में कमी आएगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी

डोरस्टेप सर्विस: नागरिक सेवाओं में बड़ा सुधार

नई सरकार ने नागरिक सेवाओं को आसान और सुलभ बनाने के लिए डोरस्टेप सर्विस की शुरुआत की घोषणा की है। इसके तहत पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और नागरिकता प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज अब डाक के माध्यम से सीधे नागरिकों के घर तक पहुंचाए जाएंगे।
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प्रतिशत बेड सभी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद के लिए मुफ्त में उपलब्ध होंगे।

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शिक्षा प्रणाली में सुधार: राजनीति से दूरी और तनावमुक्त पढ़ाई

बालेन सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में भी कई क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और उसकी जगह गैर-राजनीतिकस्टूडेंट काउंसिलबनाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही कक्षा 5 तक की आंतरिक परीक्षाओं को समाप्त कर बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम करने की कोशिश की गई है। सरकार का मानना है कि यह कदम शिक्षा को अधिक समावेशी और तनावमुक्त बनाएगा। विदेशी संस्थानों से जुडे नाम वाले इंस्टीट्यूट के नाम बदले जाएंगे।

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सरकारी कर्मचारियों पर सख्ती: राजनीति से पूर्ण प्रतिबंध

सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले का उद्देश्य प्रशासन को निष्पक्ष और पेशेवर बनाना है। नेपाल में लंबे समय से सरकारी कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें रही हैं। ऐसे में यह निर्णय प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और VIP संस्कृति का अंत

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने पिछले 20 वर्षों में सत्ता में रहे सार्वजनिक अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक न्यायिक पैनल का गठन किया है।
इसके अलावा VIP संस्कृति को खत्म करने के लिए सड़कों पर अनावश्यक रोड क्लोजर बंद कर दिए गए हैं और सरकारी कार्यालयों से नेताओं की तस्वीरें हटाई गई हैं। एक और महत्वपूर्ण फैसला यह है कि सरकारी अधिकारियों को अपने बच्चों को केवल सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाने का निर्देश दिया गया है। इससे सरकारी शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने का दबाव बढ़ेगा।

शहरी और आर्थिक सुधार: अतिक्रमण हटाओ और कस्टम नियम सख्त

शहरी विकास के तहत काठमांडू घाटी में सार्वजनिक भूमि और नदी तटों से अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज किया गया है। वहीं, आर्थिक क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा पर कस्टम नियमों को सख्त किया गया है। अब 100 रुपये से अधिक के सामान पर अनिवार्य सीमा शुल्क लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे राजस्व में वृद्धि होगी और अवैध व्यापार पर रोक लगेगी।

चुनौतियां और विवाद: विरोध और राजनीतिक दबाव

इन बड़े बदलावों के बीच सरकार को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते कुछ मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा है। छात्र राजनीति पर प्रतिबंध और कस्टम नियमों के खिलाफ युवाओं और व्यापारियों के बीच विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की गिरफ्तारी जैसे मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को ऐसे मामलों में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

बदलाव की राह पर नेपाल

नेपाल इस समय एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के फैसले पारंपरिक राजनीति को चुनौती देते हुए एक नए युग की शुरुआत का संकेत देते हैं। हालांकि विरोध और विवाद इस परिवर्तन का हिस्सा हैं, लेकिन यदि सरकार संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखती है, तो यह “Gen Z शासननेपाल के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।

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