जानें राज काज में क्या है खास
चर्चा में इंटरव्यू
संडे को पिंकसिटी में जो कुछ हुआ, उससे राजनीति में भूचाल आ गया।
मैसेज से उड़ी नींद :
संडे को पिंकसिटी में जो कुछ हुआ, उससे राजनीति में भूचाल आ गया। भूचाल आना भी स्वाभविक है। इससे उन भाइयों की नींद उड़ गई, जो बड़े बदलाव के इंतजार में राज की कुर्सी के सपने देख रहे थे और दिल्ली दरबार तक हर छोटी-मोटी गलती को बढ़ा चढ़ा कर परोस रहे थे। राज का काज करने वाले कई साहब लोगों के चेहरे पर चिन्ता लकीरें दिखाई देने लगी है। गुजराती बंधु अमित जी ने खाकी वालों के मंच पर खुले मन से अटारी वाले भजन जी के कामकाज की तारीफ की, तो पहले तो कइयों के समझ में नहीं आई कि आखिर माजरा क्या है और समझ में आई तब तक पूरे सूबे में मैसेज जा चुका था। अब राज की कुर्सी के सपने देखने वालों को कौन समझाए कि सियार के उतावलेपन से बेर नहीं पकते। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में आने वाले हार्डकोर वर्कर्स में खुसरफुसर है कि शाह जी के मैसेज को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।
चर्चा में इंटरव्यू :
सूबे में इन दिनों एक चर्चा जोरों पर है। चर्चा भी छोटी मोटी नहीं बल्कि पिछले दिनों पॉडकास्ट पर हुए इंटरव्यू को लेकर है। इंटरव्यू भी छोटे-मोटे हरकारे ने नहीं बल्कि पीएमओ तक में पैठ रखने वाली मुम्बई और दिल्ली की बड़ी कंपनी की मोहतरमा ने लिया। वो भी अटारी वाले भाई साहब को कोसों दूर रखकर राज के रत्नों में शामिल मोहतराम का लिया हुआ है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि इंटरव्यू के बदले मोटी रकम का भुगतान होने वाला ही था कि प्रसार भारती में हुई कारगुजारी पब्लिक में आ गई और वृष्चिक राषि वाले एक बड़े साहब नप गए। साहब से बडी कुर्सी छिनी, तो सूबे में भी दिलजलों ने मोहतरमा के इंटरव्यू में कई खामियां निकाल दी। अब पेमेंट की फाइल को इधर-उधर घुमाने में ही साहब लोग अपनी भलाई समझ रहे है, चूंकि मामले पर सीएमओ की भी नजरें टिकी है।
न रीति और नहीं नीति :
पिछले दिनों सूबे में एक उद्योग जोरों से चला। चलता भी क्यों नहीं, राज के रत्नों के सारे परिजनों के साथ सगे-संमंधियों तक ने जी तोड़ मेहनत जो की है। बेचारों ने दिन रात कोई कसर नहीं छोडी, जब खुद भागादौड़ी करने में थक गए, तो कारिन्दों को लगा दिया। बेचारे कई दिनों से चिन्ता में डूबे हुए थे कि उद्योग चालू हों और तीसरी पीढी तक का बंदोबस्त करने का मौका मिले। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि बिना रजिस्ट्रेशन के चलने वाले इस उद्योग में हवाला की तरह सिर्फ कोड नंबर में ही काम हुआ है। मास्टरों से ताल्लुक रखने वाले महकमें में राज के कारिन्दों को इधर-उधर करने वाले इस उद्योग में न तो रीति अपनाई गई और नहीं नीति बनाई गई। गुड गवर्नेंस को कोसों दूर रखा गया। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर चर्चा है कि कुर्सी की लड़ाई में वफादारी दिखाई है, तो उसका फायदा उठाने में भी कोई कसर नहीं छोडेंगे। चाहे भाड़ में जाए पब्लिक और वर्कर।
-एल. एल. शर्मा
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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